Dehradun News: होली नजदीक, खाद्य पदार्थों के 34 सैंपल फेल, बीमार कर सकता है मिलावटी पनीर
बाजारों में बड़े पैमाने पर मानकों को ताक पर रखकर पनीर बेचा जा रहा है। सैंपलों में फेल हुए पनीर में करीब दो प्रतिशत फैट दर्ज किया गया है।
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होली का पर्व नजदीक है। पनीर के धंधे पर सरकारी पहरा बढ़ गया है। वजह पनीर में बड़े पैमाने पर की जा रही मिलावट है। पिछले एक साल में पनीर के फेल हुए सभी सैंपलों में मिल्क फैट की जगह शरीर के लिए असुरक्षित तत्वों की मिलावट पाई गई है। पनीर में फॉरेन फैट (विजातीय वसा) और वेजिटेबल ऑयल मिला पाया गया। इन्हें अनसेफ श्रेणी में रखा गया है। इसलिए जांच-पड़ताल कर ही पनीर की खरीदारी करें। मिलावटी पनीर बीमार कर सकता है।
एफएसएसएआई के मुताबिक दूध में कम से कम 4.5 फीसदी फैट और 8.5 फीसदी एसएनएफ (सॉलिड नॉट फैट) यानी प्रोटीन, लेक्टोज, मिनरल और विटामिन होना चाहिए। लेकिन दून के बाजारों में बड़े पैमाने पर मानकों को ताक पर रखकर पनीर बेचा जा रहा है। सैंपलों में फेल हुए पनीर में करीब दो प्रतिशत फैट दर्ज किया गया है। यह स्टैंडर्ड सेहत के लिए घातक है। सस्ता पनीर लेने के फेर में खरीदार मिलावटखोरों की चांदी करा रहे हैं। इसलिए होली पर पनीर लेने जा रहे हैं, तो ठीक से पड़ताल करने के बाद ही खरीदारी करें।
400 सैंपल लैब भेजे, 34 फेल
सफेद पनीर का काला धंधा त्योहार आते ही जोर पकड़ने लगता है। खाद्य सुरक्षा विभाग भी सक्रिय हो गया है। खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से पिछले एक साल में जिले में खाद्य पदार्थों के 400 सैंपल जांच के लिए लैब भेजे गए थे। इसमें 34 सैंपल फेल होने पर मुकदमे दर्ज किए गए। इसमें पनीर में गंभीर मिलावट पाई गई। इसलिए पनीर में मिलावट के मामले सीजेएम कोर्ट में चल रहे हैं। जबकि शेष मामले एडीएम फाइनेंस के यहां। वहीं पिछले तीन महीने से करीब 150 सैंपल की रिपोर्ट अब तक नहीं आई है।
रिपोर्ट आने में लंबा समय लगता
खाद्य सुरक्षा विभाग को जांच के समय जो सैंपल खराब लगते हैं वह लैब भेजे जाते हैं। लेकिन रिपोर्ट आने में काफी समय लगता है। प्रदेश में सिर्फ एक लैब रुद्रपुर में है। लैब में अधिक सैंपल होने की वजह से रिपोर्ट आने में महीनों लग जाते हैं। अगर सैंपल खराब पाए जाते हैं तो लैब रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होती है। पिछले एक साल में खाद्य पदार्थ पनीर, मावा, घी, मसाले आदि के 34 सैंपल फेल पाए गए हैं। इन सभी में मुकदमे दर्ज किए गए हैं।
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लीगल सैंपल फेल होने पर होती है कार्रवाई
जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी पीसी जोशी ने बताया कि खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से लीगल और सर्विलांस सैंपल लिए जाते हैं। इसमें लीगल सैंपल फेल होने पर कार्रवाई होती है। सर्विलांस सैंपल फेल होने पर इंप्रूवमेंट के लिए नोटिस दिया जाता है। इसके अलावा एक और प्रक्रिया है इसमें निर्माताओं को हर छह महीने पर अपने प्रोडक्ट की जांच करवानी है। यह नियम फूड सेफ्टी स्टैंंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया की ओर से जारी किया गया है।
हरिद्वार, रुड़की में बनी लैब में सैंपल भेजे जाएंगे
पीसी जोशी ने बताया कि अब हरिद्वार, रुड़की में बनी नई लैब में सर्विलांस वाले सैंपल भेजे जाएंगे। दुकानों पर जांच करते समय अगर कोई खाद्य पदार्थ खराब लगता है या आशंका होती है कि यह पूरी तरह से खराब है तो उसे वहीं पर नष्ट कराया जाता है। यह निर्णय पूरी टीम मिलकर लेती है। अगर आशंका होती है कि खाद्य पदार्थ खाने के अनुकूल नहीं है तो सैंपल लेकर लैब भेजा जाता है। इसके अलावा दुकानदार को मना कर दिया जाता है कि इस खाद्य पदार्थ को नहीं बेचेगा।
ऐसे की जा रही मिलावट
पनीर बनाने के लिए प्रयोग किए जा रहे दूध में तेल, कास्टिक सोडा, नमक, पानी और चीनी मिलाई जा रही है। सूरजमुखी का तेल, खाद्य तेल, सपरेटा दूध, कैस्टर ऑयल आदि की मिलावट कर पनीर बनाया जा रहा है। सैंपल में भी इसकी पुष्टि हुई है।
जब दूध महंगा तो कैसे मिल सकता सस्ता पनीर
खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार एक किलो पनीर बनाने के लिए पांच लीटर दूध की जरूरत पड़ती है। एक लीटर दूध 60 रुपये में आता है। एक किलो पनीर के लिए 300 रुपये का दूध लगता है। प्रोसेसिंग चार्ज अलग से शामिल है। ऐसे में पनीर की न्यूनतम लागत 300 से 350 रुपये प्रतिकिलो पहुंच जाती है। ऐसे में सस्ते पनीर में मिलावट संभावना रहती है।
वसा युक्त पदार्थ पाचन में समय लेते हैं। एनिमल फैट पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है। जहां तक संभव हो विश्वसनीय दुकान से दूध खरीदकर घर पर ही मावा तैयार करें।
- डाॅ. एनएस बिष्ट, असिस्टेंट प्रोफेसर, दून अस्पताल