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होली की दीवाली और दीवाली की होली पर आती है रिपोर्ट
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त्योहारी सीजन में लिए गए खाद्य पदार्थों के सैंपलों की रिपोर्ट अगले त्योहारी सीजन में आती है। आलम यह है कि होली पर लिए नमूनों की रिपोर्ट दीवाली पर और दीवाली पर लिए गए नमूनों की रिपोर्ट होली पर आती है। जांच की इस धीमी गति के चलते मानवाधिकार आयोग भी अधिकारियों को तलब कर चुका है। कारण बताया जाता है कि रुद्रपुर स्थित लैब में स्टाफ की कमी और काम के बोझ के चलते यह देरी हो रही है।
दरअसल, देहरादून में खाद्य सुरक्षा विभाग ने फरवरी 2018 से फरवरी 2019 तक कुल 65 खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए थे। इनमें से मार्च तक केवल 30 सैंपलों की जांच रिपोर्ट ही आ पाई थी। यानी एक साल में जांच रिपोर्ट का यह आंकड़ा 50 फीसदी को भी नहीं छू पाया था, जबकि प्राप्त हुई रिपोर्ट में आठ खाद्य पदार्थ ऐसे थे जिनके नमूने फेल हुए थे। बाकी बचे 35 नमूनों की रिपोर्ट के लिए विभाग ने कई बार लैब को रिमाइंडर भेजने पड़े। इस धीमी रफ्तार पर खाद्य सुरक्षा विभाग को मानवाधिकार आयोग में भी फटकार लगी थी।
पिछले साल (2018) में दीवाली के समय पर लिए गए मावे और मिठाइयों के छह सैंपलों की रिपोर्ट बीती अप्रैल में आई थी। इनमें से दो पदार्थों के सैंपल फेल पाए गए थे। विभाग ने पिछले दिनों इनके खिलाफ वाद दायर किया है। इसी तरह होली पर लिए गए गुंझियां और मिल्क के सैंपलों की रिपोर्ट जून अंत में आ सकी है।
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पेंडेंसी कम करने का दावा
बीते दिनों शासन स्तर से लैब की गुणवत्ता और कामों में सुधार संबंधी बैठक हुई थी। इस बैठक में एक्ट के तहत समयावधि में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए थे। रुद्रपुर लैब प्रभारी निशांत त्यागी ने बताया कि वर्तमान समय में डेढ़ से दो माह की पेंडेंसी है। इस वक्त 27 सैंपल हैं, जिनकी जल्द से जल्द रिपोर्ट बनाने की तैयारियां चल रही हैं। उन्होंने बताया कि स्टाफ भर्ती होने के बाद इस पेंडेंसी को और भी कम कर दिया जाएगा।
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दरअसल, देहरादून में खाद्य सुरक्षा विभाग ने फरवरी 2018 से फरवरी 2019 तक कुल 65 खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए थे। इनमें से मार्च तक केवल 30 सैंपलों की जांच रिपोर्ट ही आ पाई थी। यानी एक साल में जांच रिपोर्ट का यह आंकड़ा 50 फीसदी को भी नहीं छू पाया था, जबकि प्राप्त हुई रिपोर्ट में आठ खाद्य पदार्थ ऐसे थे जिनके नमूने फेल हुए थे। बाकी बचे 35 नमूनों की रिपोर्ट के लिए विभाग ने कई बार लैब को रिमाइंडर भेजने पड़े। इस धीमी रफ्तार पर खाद्य सुरक्षा विभाग को मानवाधिकार आयोग में भी फटकार लगी थी।
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पिछले साल (2018) में दीवाली के समय पर लिए गए मावे और मिठाइयों के छह सैंपलों की रिपोर्ट बीती अप्रैल में आई थी। इनमें से दो पदार्थों के सैंपल फेल पाए गए थे। विभाग ने पिछले दिनों इनके खिलाफ वाद दायर किया है। इसी तरह होली पर लिए गए गुंझियां और मिल्क के सैंपलों की रिपोर्ट जून अंत में आ सकी है।
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पेंडेंसी कम करने का दावा
बीते दिनों शासन स्तर से लैब की गुणवत्ता और कामों में सुधार संबंधी बैठक हुई थी। इस बैठक में एक्ट के तहत समयावधि में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए थे। रुद्रपुर लैब प्रभारी निशांत त्यागी ने बताया कि वर्तमान समय में डेढ़ से दो माह की पेंडेंसी है। इस वक्त 27 सैंपल हैं, जिनकी जल्द से जल्द रिपोर्ट बनाने की तैयारियां चल रही हैं। उन्होंने बताया कि स्टाफ भर्ती होने के बाद इस पेंडेंसी को और भी कम कर दिया जाएगा।