उत्तराखंड की अनोखी परंपराः रंगों से नहीं, रागों से मनाते हैं यहां होली का उत्सव
- उत्तराखंड की अनोखी परंपरा है कुमाऊंनी बैठकी और खड़ी होली
- शहर में वर्ष 1980 से कूर्मांचल परिषद कर रही आयोजन, इस बार एक मार्च को होगा भव्य कार्यक्रम
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कुमाऊंनी होली एक ऐसी परंपरा है जो आज प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश में भी काफी लोकप्रिय हो चुकी है। पौष का महीना आते ही कुमाऊंनी परिवारों के आंगन में बैठकी होली से इस पर्व की शुरुआत होती है। हर घर में महिलाओं का उल्लास, उमंग और पारंपरिक गीतों की मधुर ध्वनि मन को सुकून देती है। यही वजह है कि इस पर्व को उत्तराखंड के बाहर भी पसंद किया जा रहा है।
शहर में कुमाऊंनी बैठकी एवं खड़ी होली को पर्व के रूप में मनाया जाता है। 1980 से कूर्मांचल सांस्कृतिक एवं कल्याण परिषद की ओर से इसका आयोजन हो रहा है। परिषद की दस शाखाएं हैं। सभी शाखाएं अलग-अलग खड़ी होली का आयोजन करती हैं। प्रदेशभर से कुमाऊंनी लोग इस पर्व में शामिल होने के लिए पहुंचते हैं। कुमाऊंनी वेशभूषा पहनकर महिला और पुरुष समूहों में पारंपरिक गीतों पर थिरकते हैं। बच्चा, बुजुर्ग और नौजवान, हर कोई उमंग और उल्लास में डूबा रहता है। अन्य समाज के लोग भी कुमाऊंनी होली में शामिल होते हैं। यह पर्व संस्कृति प्रेम का शानदार उदाहरण है।
बैठकी और खड़ी होली मनाने की है परंपरा
पौष मास के पहले रविवार से बैठकी होली की शुरुआत होती है। इसमें महिलाएं व पुरुष एक दूसरे के आंगन में रोजाना बैठकी होली मनाते हैं। इसमें ईश्वर को समर्पित पारंपरिक गीत गाए जाते हैं। वसंत पंचमी के आते ही होल्यारों का उत्साह और अधिक बढ़ जाता है।
इसके बाद महाशिवरात्रि से खड़ी होली शुरू होती है, जिसमें महिलाएं व पुरुष समूहों में कदमताल करते हुए गीतों पर झूमते हैं। यह पर्व लगातार चलता रहता है। पहले यह पर्व सिर्फ कुमाऊं मंडल तक सीमित हुआ करता था, लेकिन आज यह गढ़वाल मंडल में भी बड़ा पर्व बन चुका है।
थाली बजाना भी होता है खास
यह एक ऐसी अनोखी होली है, जिसे रंगों से नहीं रागों से मनाया जाता है। इस होली में पारंपरिक गीतों की मुख्य भूमिका है और वाद्य यंत्रों की जुगलबंदी इस उल्लास को और खास बनाती है। महिलाएं-पुरुष ढोल, मंजीरे, हारमोनियम, हुड़के, चिमटे, ढपली की मधुर ध्वनि संगीत में जान डालती हैं। वहीं, थाली बजाने की भी खास परंपरा है।
एक मार्च को होगा भव्य आयोजन
कूर्मांचल परिषद की ओर से एक मार्च को जीएमएस रोड स्थित कूर्मांचल भवन में भव्य आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम में हर बार की तरह पारंपरिक अंदाज में महिलाएं व पुरुष होली मनाएंगे। आयोजन को लेकर परिषद की ओर से तैयारियां जोरों पर हैं।
कुमाऊंनी बैठकी एवं खड़ी होली उत्तराखंड ही नहीं, देशभर में लोकप्रिय है। यह संस्कृति प्रेम का प्रतीक है। देहरादून में करीब 40 साल से यह सफल आयोजन होता आ रहा है। कुमाऊंनी के साथ ही समाज के लोग भी इसमें हिस्सा लेते हैं।
- कमल रजवार, केंद्रीय अध्यक्ष, कूर्मांचल सांस्कृतिक एवं कल्याण परिषद