बदल रही है हिमालय क्षेत्र की वनस्पतियों की केमिस्ट्री
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जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों का सामना कर रही हिमालय क्षेत्र के वनस्पतियों की केमिस्ट्री अब बदल रही है। वन अनुसंधान संस्थान के शोध से ऐसा खुलासा हुआ है। अध्ययन के मुताबिक इस बदलाव से वनस्पतियों की गुणवत्ता में गिरावट आ सकती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग के इस दौर में खुद को जीवित रखने के लिए वनस्पतियों में ऐसा अनुकूलन देखा जा रहा है।
वन अनुसंधान संस्थान के जलवायु परिवर्तन विभाग के शोध में पाया गया है कि वनस्पतियों की केमिस्ट्री के साथ ही उनके जीन में भी बदलाव आ रहा है। चारा प्रजातियों ने अपनी कड़वाहट बढ़ा दी है। ऐसा इसलिए ताकि जानवर उन्हें न चरें। अध्ययन के मुताबिक वनस्पतियों के जीन में भी बदलाव देखे जा रहे हैं।
एफआरआई के जलवायु परिवर्तन विभाग ने शोध में पाया है कि बदरी चाय जो बदरीनाथ धाम के आसपास सर्द माहौल में पनपती है, उसमें गर्मी में भी जीने की अद्भुत क्षमता विकसित हुई है। जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालय क्षेत्र में अचानक बहुत अधिक बर्फबारी और एक ही वक्त में इकट्ठी बारिश हो रही है। ऐसी स्थितियों में पहले की तरह ठंडक बहुत दिनों तक नहीं रहती, तापमान भी अचानक बढ़ने लगता है।
भविष्य के लिए खुद को बचा रही हैं वनस्पतियां
यही कारण है कि बर्फबारी के बाद लंबे दिनों तक ठंडक झेलने की आदी वनस्पतियों ने अब खुद को बदलना शुरू किया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि वनस्पतियों में आ रहा यह बदलाव भविष्य में खुद को बचाए रखने के लिए आ रहा है। बर्फबारी के दौरान उच्च हिमालय क्षेत्र में देखा गया कि यहां वृक्षों ने पर्यावरणीय संकेतों को समझ लिया है। वे अब अपने बीजों को पहले ही गिरा दे रहे हैं। बाद में ये बीज निष्क्रिय अवस्था में बर्फ के नीचे मिट्टी में दबे रह रहे हैं और धूप निकलते ही सक्रिय हो जा रहे हैं।
पौधों का प्राथमिक रक्षा तंत्र भी हुआ मजबूत
संस्थान के वरिष्ठ विज्ञानी डॉ. ओमवीर सिंह के मुताबिक सेकेंडरी मेटॉबोलिज्म के तहत बहुत सी वनस्पतियों ने अपने प्राथमिक रक्षा तंत्र को भी और मजबूत किया है और खुद में फिनोलिक कंपाउंड और टर्पिन बढ़ा दिए हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक वनस्पतियां बीमारियों में भी ऐसा करती हैं।