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बदल रही है हिमालय क्षेत्र की वनस्पतियों की केमिस्ट्री

Mon, 17 Apr 2017 09:53 AM IST
रजा शास्त्री,देहरादून
रजा शास्त्री,देहरादून Updated Mon, 17 Apr 2017 09:53 AM IST
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himalays Trees are changing their behave
हिमालय क्षेत्र की वनस्पतियां

जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों का सामना कर रही हिमालय क्षेत्र के वनस्पतियों की केमिस्ट्री अब बदल रही है। वन अनुसंधान संस्थान के शोध से ऐसा खुलासा हुआ है। अध्ययन के मुताबिक इस बदलाव से वनस्पतियों की गुणवत्ता में गिरावट आ सकती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग के इस दौर में खुद को जीवित रखने के लिए वनस्पतियों में ऐसा अनुकूलन देखा जा रहा है।

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वन अनुसंधान संस्थान के जलवायु परिवर्तन विभाग के शोध में पाया गया है कि वनस्पतियों की केमिस्ट्री के साथ ही उनके जीन में भी बदलाव आ रहा है। चारा प्रजातियों ने अपनी कड़वाहट बढ़ा दी है। ऐसा इसलिए ताकि जानवर उन्हें न चरें। अध्ययन के मुताबिक वनस्पतियों के जीन में भी बदलाव देखे जा रहे हैं।
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एफआरआई के जलवायु परिवर्तन विभाग ने शोध में पाया है कि बदरी चाय जो बदरीनाथ धाम के आसपास सर्द माहौल में पनपती है, उसमें गर्मी में भी जीने की अद्भुत क्षमता विकसित हुई है। जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालय क्षेत्र में अचानक बहुत अधिक बर्फबारी और एक ही वक्त में इकट्ठी बारिश हो रही है। ऐसी स्थितियों में पहले की तरह ठंडक बहुत दिनों तक नहीं रहती, तापमान भी अचानक बढ़ने लगता है।

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भविष्य के लिए खुद को बचा रही हैं वनस्पतियां

himalays Trees are changing their behave

यही कारण है कि बर्फबारी के बाद लंबे दिनों तक ठंडक झेलने की आदी वनस्पतियों ने अब खुद को बदलना शुरू किया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि वनस्पतियों में आ रहा यह बदलाव भविष्य में खुद को बचाए रखने के लिए आ रहा है। बर्फबारी के दौरान उच्च हिमालय क्षेत्र में देखा गया कि यहां वृक्षों ने पर्यावरणीय संकेतों को समझ लिया है। वे अब अपने बीजों को पहले ही गिरा दे रहे हैं। बाद में ये बीज निष्क्रिय अवस्था में बर्फ के नीचे मिट्टी में दबे रह रहे हैं और धूप निकलते ही सक्रिय हो जा रहे हैं।

पौधों का प्राथमिक रक्षा तंत्र भी हुआ मजबूत
संस्थान के वरिष्ठ विज्ञानी डॉ. ओमवीर सिंह के मुताबिक सेकेंडरी मेटॉबोलिज्म के तहत बहुत सी वनस्पतियों ने अपने प्राथमिक रक्षा तंत्र को भी और मजबूत किया है और खुद में फिनोलिक कंपाउंड और टर्पिन बढ़ा दिए हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक वनस्पतियां बीमारियों में भी ऐसा करती हैं।

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