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Himalaya Diwas: सीएम धामी बोले- हमारी संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिक चेतना की अनमोल धरोहर है हिमालय

Tue, 09 Sep 2025 09:37 PM IST
अलका त्यागी संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 09 Sep 2025 09:37 PM IST
सार

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने हिमालय दिवस की शुभकामनाएं देते हुए सभी से हिमालय संरक्षण संबंधी कार्यों में अपना योगदान देते हुए मिलकर कार्य करने का आह्वान किया।

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Himalaya Diwas: CM Dhami said, Himalaya is a precious heritage of our culture, tradition and spiritual conscio
हिमालय दिवस पर कार्यक्रम - फोटो : उत्तराखंड सूचना विभाग

विस्तार

आईआरडीटी सभागार में हिमालय दिवस पर यूकॉस्ट की ओर से त्रासदी में हिमालय कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान हिमालय को बचाने की शपथ वन मंत्री सुबोध उनियाल ने दिलाई। कार्यक्रम में हिमालय में आई आपदा में जान गंवाने वाले लोगों की आत्मा की शांति के लिए सभी ने एक मिनट का मौन भी रखा।

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मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे सीएम पुष्कर सिंह धामी ने हिमालय दिवस की शुभकामनाएं देते हुए सभी से हिमालय संरक्षण संबंधी कार्यों में अपना योगदान देते हुए मिलकर कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हिमालय की पर्वत संरचना भौगोलिक संरचनाएं नहीं बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिक चेतना की अनमोल धरोहर भी हैं। इसकी ऊंचाइयों में हमारे राष्ट्र का गौरव समाया हुआ है। इसकी घाटियों में हमारे प्राकृतिक संसाधनों का खजाना भी छिपा है। इसकी ऊंची चोटियां, विस्तृत गलेश्यिर, नदियां, जैव विविधता से भरपूर वन हमें न केवल प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव कराते हैं बल्कि पर्यावरणीय संतुलन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हिमालय केवल हमारी परंपरा, संस्कृति का हिस्सा नहीं, बल्कि विज्ञान की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं।
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उन्होंने हिमालय क्षेत्र में स्थित जल स्रोतों के संरक्षण, व्यापक पौधरोपण, जंगल की आग को रोकने, प्लास्टिक का प्रयोग रोकने में सभी के सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के फलस्वरूप हिमालय में विभिन्न प्रकार की प्राकृतिक आपदाएं समय-समय पर आती हैं। इसलिए हम सभी को वैज्ञानिक पद्धतियों के साथ-साथ परंपरागत पद्धतियों एवं ज्ञान के साथ कार्य करना होगा।
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कार्यक्रम में हेस्को के संस्थापक पद्म भूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने हिमालय की पीड़ा को व्यक्त करते हुए कहा कि आज हम सभी को भेद मिटाकर एक साथ हिमालय संरक्षण संबंधी कार्यों से जुड़ने की आवश्यकता है। राज्य में आज विभिन्न प्रकार से विभिन्न पद्धतियों को अपनाकर कार्य किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आज विकास की भी आवश्यकता है और आम जनमानस और प्रकृति को कोई नुकसान न हो यह भी हमें ध्यान रखना होगा।

कार्यक्रम में उपस्थित प्रो. दुर्गेश पंत ने कहा कि हिमालय दिवस के अवसर पर हम सभी को अपने परंपरागत ज्ञान विज्ञान के साथ-साथ आधुनिक विज्ञान के साथ समन्वय स्थापित करते हुए पर्यावरण संरक्षण कार्यों को सामाजिक सहभागिता से सुनिश्चित करना होगा। पूर्व मुख्यमंत्री एवं भारत सरकार के पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि हमें वनों का संरक्षण करना है और लगाए गए पौधों की सुरक्षा इस प्रकार करनी है जैसे हम अपने बच्चों की देखभाल करते हैं।


सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि हम सभी को एक साथ इन प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ कार्य करने की आवश्यकता है। वन मंत्री सुबोध उनियाल नेजंगली जीवों के संरक्षण, जल स्रोतों को बचाने, इको टूरिज्म अपनाने पर बल दिया। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने विशेष प्लांटेशन पॉलिसी को लागू किया। टिहरी विधायक किशोर उपाध्याय ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण संबंधी कार्यों में हम सबको अपना अपना दायित्व अवश्य निभाना चाहिए।

कार्यक्रम में राज्य मंत्री मधु भट्ट, डॉ. भवतोष शर्मा, डॉ. किरण नेगी आदि ने भी अपने विचार रखे। इस दौरान विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के सदस्य, महिलाएं, विद्यार्थी, यूकॉस्ट एवं हेस्को के वैज्ञानिक, शिक्षक आदि मौजूद रहे।

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