Save Himalaya: अस्तित्व खो चुके सलेमपुर तालाब को संवारने का संकल्प, हिमालय बचाओ अभियान में दिलाई शपथ
गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के पर्यावरण विभाग के सभागार में हुए संवाद कार्यक्रम में विभिन्न वर्गों और क्षेत्रों से जुड़े हुए लोग शामिल हुए।
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अमर उजाला हिमालय बचाओ अभियान 2022 के अंतर्गत बृहस्पतिवार को गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान पर्यावरणविदों एवं विशेषज्ञों ने जल संरक्षण के लिए अस्तित्व खो चुके तालाबों को संवारने का आह्वान किया। गुरुकुल के कुलपति प्रो. रूप किशोर शास्त्री ने बहादराबाद के सलेमपुर गांव के तालाब को संवारने का संकल्प दिलाया। कहा कि गुरुकल विवि जनसहभागिता से तालाब को पुनर्जीवित करेगा। पर्यावरणविदों ने पॉलिथीन की जगह कपड़े और जूट के थैले का प्रयोग करने, गंगा में गंदगी और प्लास्टिक नहीं डालने का संकल्प भी लिया।
गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के पर्यावरण विभाग के सभागार में हुए संवाद कार्यक्रम में विभिन्न वर्गों और क्षेत्रों से जुड़े हुए लोग शामिल हुए। गुरुकल कांगड़ी विवि के कुलपति रूप किशोर शास्त्री ने कहा कि हमारा समस्त जीवन पंचतत्व से चलता है, जिसमें पृथ्वी, जल, वायु, आकाश और अग्नि महत्वपूर्ण हैं। ये न तो हमसे अलग हो सकते हैं और न ही हम इनसे दूर रखकर जीवनयापन कर सकते हैं, इसलिए प्रकृति का दोहन करें, शोषण नहीं। प्रकृति को बचाना उत्तराखंड और देश का ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि आज तालाब विलुप्त हो गए हैं। इससे जल संकट खड़ा हो रहा है, इसलिए पुराने तालाबों को पुनर्जीवित करना जरूरी है ताकि बारिश में जल संचय होने से भूमिगत जलस्तर बढ़ाया जा सके। उन्होंने सलेमपुर तालाब को संवारने और पुनर्जीवित करने का संकल्प दिलाया।
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कुलसचिव सुनील कुमार ने कहा कि प्रकृति से खिलवाड़ से सबकुछ नष्ट हो रहा है। शहरी क्षेत्रों में तालाबों का अस्तित्व खत्म हो चुका है। गांव-देहात में तालाब कूड़ाघर बन गए हैं। उन्होंने कहा कि सलेमपुर तालाब पुनर्जीवित होने से मवेशियों को पानी मिल पाएगा। भूमिगत जलस्तर बढ़ने से हैंडपंप से साफ पानी मिलेगा। गांव भी गंदगी मुक्त होगा। किशोर अंतरराष्ट्रीय पर्यावरणविद् रिद्धिमा पांडे ने कहा कि कूड़े को जलाकर उसका निस्तारण करना सभी को बेहद आसान तरीका लगता है। लेकिन इससे हिमालय को नुकसान पहुंच रहा है।
कहा कि पहले दिल्ली और हरिद्वार के मौसम में अंतर रहता था लेकिन आज पर्यावरण के बिगड़ते संतुलन की वजह से हरिद्वार भी दिल्ली जैसा बनता जा रहा है। उन्होंने ऑल वेदर रोड को बहुत ज्यादा जरूरी नहीं बताया। कहा कि पर्यावरण को बचाना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। राजकीय कन्या इंटर कॉलज की प्रधानाचार्य पूनम राणा ने कहा कि हिमालय बचाओ अभियान एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि यह हमारे अस्तित्व का विषय है। कहा कि छात्र पर्यावरण बचाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इस मौके पर प्रो. नमिता जोशी, संगीता मदान, दिनेश पांडे, निशांत वशिष्ठ, कपिल और उपेंद्र आदि मौजूद रहे।
कभी मवेशी बुझाते थे प्यास, आज खुद पानी को तरसा तालाब
सलेमपुर गांव में अस्तित्व खो चुका तालाब राजकीय इंटर कॉलेज के सामने है। कभी तालाब में ग्रामीण अपने पशुओं को रोजाना नहलाने के साथ ही पानी पिलाते थे। गांव के बच्चे और युवा गर्मियों में तालाब में डुबकी लगाते थे। बच्चे तैरना भी सीख जाते थे। तालाब की मिट्टी से कच्चे घरों की लिपाई होती थी लेकिन आज तालाब अस्तित्व खो चुका है। तालाब में गंदगी भरी है। घास उगी है। तालाब खुद पानी के लिए तरस रहा है। सरकारी रिकार्ड में तालाब 18 बीघे का है। लेकिन अतिक्रमण के चलते तालाब का क्षेत्रफल 12 बीघे के करीब बचा है। इसमें भी गांव के लोग अपने घरों की गंदगी डाल रहे हैं। तालाब संवरने से गांव की जलभराव की समस्या काफी हद तक दूर हो जाएगी। बारिश का पानी तालाब में एकत्र होगा।
पर्यावरणविदों को किया सम्मानित
अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में पर्यावरण और अन्य सामाजिक सरोकार से जुड़े कार्य करने वाले लोगों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इसमें अंतरराष्ट्रीय किशोर पर्यावरणविद् रिद्धिमा पांडे, दिव्य सेवा प्रेम मिशन के संजय चतुर्वेदी और गुरुकुल कांगड़ी पर्यावरण विभाग के विभागाध्यक्ष डीएस मलिक को सम्मानित किया गया। अतिथियों को भी पौधे और केदारनाथ मंदिर का स्मृति चिन्ह भेंट किया गया।
बोले विशेष और लोग
ऑल वेदर रोड को बनाया जाना इसलिए जरूरी है क्योंकि यह देश की सुरक्षा के लिए आवश्यक है ताकि सड़क बनने से सेना आसानी से सीमाओं पर पहुंच सके। लेकिन इसमें यह भी ध्यान रखा जाए कि पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचाया जाए।
- प्रो. आरसी दुबे, विशेषज्ञ
प्रकृति और पर्यावरण को बचाने के लिए सबसे पहले हमें उन्हें जानना होगा। उन क्षेत्रों में जाना होगा, तभी तो पर्यावरण और हिमालय को बचाया जा सकता है। पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए पक्षियों और जानवरों को संरक्षित करना भी आवश्यक है। इसके लिए तालाबों का संरक्षण बेहद जरूरी है।
-प्रो. दिनेश भट्ट, पक्षी विशेषज्ञ
पर्यावरण के क्षेत्रीय संतुलन के लिए सरकार की ओर से स्थानीय संस्थाओं को शामिल किया जाना जरूरी है। हिमालय संरक्षण के लिए लोगों की भागीदारी बेहद आवश्यक है। संरक्षण के संचार की भी बहुत आवश्यकता है।
-सहायक प्रोफेसर गगन मत्ता, पर्यावरण विभाग
ऑल वेदर रोड को लेकर देश-दुनिया में काफी चर्चा है। अगर ऑल वेदर रोड को बनाया जाना आवश्यक है तो उसमें पेड़-पौधों को कम से कम खत्म किया जाए। काटे गए पेड़ों की जगह दोगुना पौधे लगाए ही नहीं लगाए जाएं, बल्कि उन्हें तैयार भी किया जाए।
-पवन कुमार, शोध छात्र
चंडी देवी मंदिर जंगलों से घिरा हुआ स्थान है, लेकिन वहां प्लास्टिक और पॉलिथीन के ढेर लगे हुए हैं। श्रद्धालुओं से अपील है कि अगर उनकी मंदिर में आस्था है तो वे यहां आकर पॉलिथीन और प्लास्टिक का प्रयोग न करें।
-हर्ष चौधरी, बीएससी छात्र
जंगल खत्म हो रहे हैं और तालाब सूख रहे हैं, इसलिए जंगली जानवर आबादी क्षेत्र में आ रहे हैं। जंगली जानवरों को बचाने के लिए पर्यावरण का ध्यान रखना होगा और जंगलों में तालाबों की संख्या बढ़ाई जाए। उनके भोजन की भी व्यवस्था की जाए।
-दिनेश लखेड़ा, कर्मचारी नेता