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उत्तराखंड के बल्ले से लगेंगे चौके-छक्के!

Thu, 26 Sep 2013 04:42 PM IST
विजेंद्र श्रीवास्तव/अमर उजाला, हल्द्वानी
विजेंद्र श्रीवास्तव/अमर उजाला, हल्द्वानी Updated Thu, 26 Sep 2013 04:42 PM IST
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Himachal Will give Uttarakhand the clones of Saliks willow

आने वाले समय में उत्तराखंड की लकड़ी से तैयार बल्ले से चौके-छक्के और शतक लग सकेंगे। जिस पेड़ की लकड़ी (सैलिक्स विलो) से क्रिकेट बैट तैयार होते हैं जंगलात ने उन्हें उत्तराखंड में उगाने की योजना तैयार की है।

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इसमें हिमाचल भी मदद को आगे आया है। वह जंगलात को तेजी से तैयार होने वाली सैलिक्स विलो प्रजाति के क्लोन देने को तैयार हो गया है। जंगलात पहले चरण में कुमाऊं के दो जगहों से इसकी शुरुआत करेगा।
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बल्ले मेरठ के लकड़ी हिमाचल की
क्रिकेट के बैट उत्तराखंड से लगे यूपी के मेरठ आदि जगहों पर तैयार होते हैं पर इनके लिए सैलिक्स विलो लकड़ी की आपूर्ति जम्मू-कश्मीर और हिमाचल जैसी जगहों से होती है।
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22 देशों से मंगवाए क्लोन
पहले हिमाचल में भी सैलिक्स विलो की प्रजाति नहीं थी पर संभावना को देखते हुए हिमाचल ने 22 देशों से सैलिक्स विलो के क्लोन मंगाए।

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इसमें से तेजी से तैयार होने वाली चुनिंदा प्रजातियों को वह लगा रहा है, जिससे लोगों को खूब रोजगार मिला है। इस प्रजाति की लकड़ी के अलावा पौध तैयार करने के काम के लिए ही खूब राशि मिल रही है।

पौध के लिए 50 लाख का ठेका
हिमाचल से दौरे पर लौट कर आए अधिकारियों के अनुसार केवल इसी साल सैलिक्स विलो की पौध तैयार करने के लिए 50 लाख का ठेका मिला है।

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हिमाचल के सोलन विवि में सैलिक्स के अध्ययन को गए अनुसंधान विभाग के सहायक वन संरक्षक बीएस शाही कहते हैं कि हमारे यहां इस प्रजाति को लगाने के लिए काफी संभावना है। यह पहाड़ में एग्रो फारेस्टी में मददगार बनेगा।

हिमाचल प्रजातियों को देने को तैयार
हिमाचल तेजी और व्यास (मोटाई) वाली कुछ प्रजातियों का देने को तैयार है। हम शुरुआत में इनका ट्रायल नैनीताल जिले में काकड़ीघाट और रानीखेत में करेंगे।

यह प्रजाति मिट्टी क्षरण को भी रोकती है, इससे पहाड़ में भूस्खलन जैसी समस्याओं पर भी रोक लग सकेगी। सैलिक्स विलो लकड़ी के दूसरे भी इस्तेमाल है जिसमें यह लकड़ी प्रयोग होती है।

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75 फीट का पेड़
हिमाचल में निरीक्षण को पहुंची टीम सैलिक्स विलो के 75 फीट के पेड़ को देखकर दंग रह गई। एसडीओ शाही कहते हैं कि इसका पेड़ बिल्कुल सीधा होता है।

मार्च में लगाए गए पौधे को देखकर वह दंग रह गए थे, वह चार सितंबर को ही 12 फीट से ऊंचे हो गए थे। एक पेड़ से ही व्यक्ति को आठ से नौ हजार की राशि मिल सकती है।

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