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हरिद्वारः बाईपास मार्ग बने तो जाम से मिले निजात
मुकेश शर्मा / अमर उजाला, मंगलौर
Updated Wed, 26 Apr 2017 03:11 PM IST
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नेशनल हाईवे
- फोटो : demo pic
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हरिद्वार जिले के मंगलौर में हाईवे चौड़ीकरण और फोरलेन निर्माण के तहत मखियाली दूंदी से कोर तक 13 किलोमीटर बाईपास का निर्माण सात साल में भी पूरा नहीं हो पाया है।
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इसके बनने से रुड़की और आसपास के क्षेत्रों को जाम से निजात मिलने की उम्मीद है, लेकिन इसके लिए अधिग्रहीत भूमि का मुआवजा कम मिलने से लोगों ने न्यायालय में वाद दायर किया हुआ है। जिसकी वजह से आधे से अधिक बाईपास पर काम शुरू नहीं हो पाया है।
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एनएच-58 को फोरलेन में तब्दील करने और इसके चौड़ीकरण के लिए एनएचएआई की ओर से वर्ष 2010 में काम शुरू कराया गया था। इस प्रोजेक्ट के लिए 1275 करोड़ का बजट रखा गया है। इसके तहत मंगलौर-रुड़की हाईवे के बीच स्थित मखियाली दूंदी नामक राजस्व गांव से पीरपुरा, बिझौली, नगला इमरती, खटका-खटकी, ढंडेरी ख्वाजगीपुर होते हुए रुड़की-हरिद्वार मार्ग स्थित कोर तक 13 किलोमीटर लंबा बाईपास बनाया जाना है।
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इसके लिए उक्त गांवों के लोगों की भूमि भी अधिग्रहीत की गई। इसमें पीरपुरा, बिझौली और नगला के करीब 25-30 किसानों ने भूमि अधिग्रहण के एवज में मिली मुआवजे की राशि को कम बता कर न्यायालय में वाद दाखिल किया है। मामला न्यायालय में होने के कारण इस बाईपास के साढ़े सात किलोमीटर हिस्से पर कोई काम नहीं हो पाया है। अलबत्ता खटका से कोर तक बाईपास निर्माण का काम हो रहा है। बाईपास में नगला इमरती में रेलवे ब्रिज और सोलानी पर भी पुल बनना है। इन पर काम चल रहा है। बाईपास का काम पूरा नहीं होने का खामियाजा रुड़की और मंगलौर के क्षेत्रवासियों को आए दिन लग रहे जाम के रूप में उठाना पड़ रहा है।
वाद निपटने के बाद लगेंगे सात माह
हाईवे और बाईपास का निर्माण करने वाली एजेंसी ईरा के उप महाप्रबंधक गिरजेश त्रिपाठी का कहना है कि भूमि अधिग्रहण का मामला कोर्ट में होने की वजह से बाईपास का निर्माण कार्य लटका हुआ है। इसके निपटने के बाद छह से सात माह के भीतर बाईपास तैयार होने की उम्मीद है।