अब बिना खतरे के पटरियों पर दौड़ेगी हाईस्पीड ट्रेन
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देश में मौजूदा रेलवे ट्रैक हाईस्पीड ट्रेनों की 250 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार को झेलने के लिए तैयार नहीं हैं। इन पर हाईस्पीड ट्रेनों का संचालन दुर्घटनाओं का सबब बन सकता है।
रेल मंत्रालय ने इस समस्या से निपटने के लिए कंपनमुक्त रेलवे ट्रैक की तकनीक तैयार करने की बाबत आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिक डॉ. सत्येंद्र मित्तल से करार किया है। बीते नौ फरवरी को रेलवे ने ‘टेक्नोलॉजी मिशन ऑफ इंडियन रेलवे’ (टीएमआईआर) की नौ सदस्यीय टीम का गठन किया।
टीम में डॉ. सत्येंद्र मित्तल भी शामिल हैं। ट्रेनें 250 की रफ्तार से दौड़ें, इसके लिए ट्रैक को कंपन और धंसाव मुक्त बनाने के लिए ‘वाइब्रेशन आब्जर्वर’ की जरूरत होगी। इसे तैयार करने के लिए रेलवे ने डॉ. सत्येंद्र मित्तल को जिम्मेदारी सौंपी है और एमओयू साइन किया है।
तैयार करना है तीन तरह की पटरियों के डिजाइन
करार के तहत डॉ. मित्तल को तीन तरह की पटरियों के लिए डिजाइन बनाना है। इनमें चिकनी, रेतीली और पथरीली मिट्टी पर बने ट्रैक शामिल हैं। यह काम दो साल में पूरा किया जाएगा। डॉ. मित्तल ने बताया कि वाइब्रेशन आब्जर्वर ट्रैक के स्लीपर नीचे लगाए जाते हैं।
इसे तैयार करने के लिए थर्मोकोल, कार्क, लकड़ी का बुरादा तथा पॉलीमर आदि पदार्थों का उपयोग किया जाएगा। इससे ट्रैक के आधार को मजबूती मिलेगी, कंपन भी नहीं होगा और हाईस्पीड ट्रेनों को 250 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार दी जा सकेगी।
मालगाड़ियों के लिए 300 किमी प्रति घंटा की रफ्तार देने वाला ट्रैक
डॉ. सत्येंद्र मित्तल ने बताया कि उनको एक दूसरे प्रोजेक्ट पर काम के लिए भी केंद्र से स्वीकृति मिली है। इसके तहत मालगाड़ियों को 300 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से दौड़ाया जा सकेगा। देश में मौजूदा ट्रैक 22.5 से 25 किलो न्यूटन प्रति वर्ग मीटर भार वहन करने में सक्षम है।
हाईस्पीड के लिए 32.5 किलो न्यूटन प्रति वर्ग मीटर की क्षमता के हिसाब से ट्रैक को मजबूत बनाना होगा। इस बाबत स्वीकृत प्रोजेक्ट पर जल्द एमओयू साइन होने की उम्मीद है। प्रोजेक्ट के तहत ट्रैक के नीचे की मिट्टी को फैलने से रोकने व तेज गति देने वाले ट्रैक के नजदीक बने भवनों में कंपन रोकने के उपाय भी किए जाएंगे।