देहरादून: एक चूक से सरकार के हाथ से फिसली अरबों की जमीन
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प्रशासन की एक छोटी सी चूक से सरकार के हाथ से अरबों रुपये की जमीन फिसल गई। कारगी-पटेलनगर क्षेत्र की इस करीब तीन सौ बीघा जमीन से सरकार ने कुछ समय पूर्व पट्टेधारकों को हटाया था। इसके विरोध में पट्टेधारक कोर्ट गए। कोर्ट में प्रशासन ने सही जानकारी नहीं दी, जिसके चलते फैसला सरकार के खिलाफ चला गया।
काउंटर फाइल करते वक्त प्रशासन ने कोर्ट में यह तथ्य नहीं रखा कि जमीन से कब्जा हटाया जा चुका है। ऐसे में कोर्ट ने जो स्टे दिया, उससे पट्टेधारकों को राहत मिली जबकि सरकार नुकसान में रही। अब विभाग एक-दूसरे पर इसकी जिम्मेदारी डाल रहे हैं।
दरअसल कारगी-पटेलनगर क्षेत्र में करीब 300 बीघा जमीन वर्ग तीन के तहत पट्टे पर दी गई थी। कुछ समय पूर्व पट्टे की शर्तों का उल्लंघन होने पर एसडीएम सदर ने इन्हें निरस्त कर दिया। बाद में यह मामला एसडीएम सदर की कोर्ट में पहुंचा।
यह था पूरा मामला जिस पर हाईकोर्ट ने दिया स्टे
एसडीएम ने पट्टे निरस्त कर जमीन नगर निगम में निहित करने के निर्देश दिए। राजस्व विभाग ने जमीन कब्जाधारकों से खाली कराकर नगर निगम को सौंप दी। एमडीडीए के सहयोग से जमीन पर तार-बाड़ भी करवा दी गई। इसी बीच पट्टेधारक कमिश्नर कोर्ट में गए जहां से उन्हें स्टे मिल गया, हालांकि सुनवाई के बाद कोर्ट ने स्टे खारिज कर दिया।
शासन ने यह जमीन रिवर फ्रंट डेवलपमेंट स्कीम के तहत एमडीडीए को दे दी। इस पर पट्टाधारकों ने हाईकोर्ट में रिट दायर कर दी। उन्होंने इस मामले में नगर निगम और जिला प्रशासन को पार्टी बनाया। प्रशासन ने काउंटर फाइल किया, लेकिन उसमें यह तथ्य नहीं बताया कि कब्जा हटाकर, जमीन को निगम में निहित किया जा चुका है।
इस पर कोर्ट ने पट्टेधारकों के कब्जे की यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए। इसके बाद डीएम ने आदेश जारी कर 16 नवंबर 2015 की स्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए, जिसके अनुसार जमीन पर पट्टेधारक काबिज हैं।
पट्टेधारकों को मदद कर रहे भूमाफिया
दरअसल, अरबों रुपये की इस जमीन पर कई भूमाफियाओं की भी गिद्ध दृष्टि लगी है। सूत्रों की मानें तो पट्टेधारकों को वह हर तरह से मदद पहुंचा रहे हैं। पट्टेधारकों को उनकी जमीन वापस दिलाने का लालच दिया जा रहा है। अब कोर्ट के आदेश के बाद उनका काम आसान हो गया है।
कोर्ट में यह तथ्य क्यों नहीं रखा गया, इसकी मुझे जानकारी नहीं है। कोर्ट की अवमानना का मामला सामने आने के बाद जिलाधिकारी ने 16 नवंबर 2015 की स्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।
-स्वाति भदौरिया, एसडीएम सदर
रिट पिटिशन के बाद हमने एमडीडीए को काउंटर दाखिल करने के लिए अधिकृत किया है। जमीन एमडीडीए को मिली है, इसलिए काउंटर फाइल भी वहीं करेंगे।
-नितिन भदौरिया, नगर आयुक्त