हाईकोर्ट ने बेनाम भूमि को लेकर पूर्व सीएम खंडूड़ी का आदेश किया रद्द, जानिए पूरा मामला
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हाईकोर्ट ने छह साल बाद बेनाम भूमि को लेकर पूर्व सीएम बीसी खंडूरी की ओर से जारी किया गया आदेश रद्द कर दिया है। आगे जानिए पूरा मामला...
राज्य की सभी बेनाप भूमि, जिसकी पैमाइश नहीं हुई हो और बंदोबस्त के समय छोड़ दी गई हो उस पर वन कानून लागू हो गया है। हाईकोर्ट ने 2011 में तत्कालीन खंडूड़ी सरकार के उस आदेश का खारिज कर दिया है, जिसमें 1893 के नोटिफिकेशन को खत्म कर दिया गया था।
इसके तहत सभी बेनाप भूमि को इंडियन फारेस्ट एक्ट-1878 के अधीन लाया गया था। अब पूर्व की तरह ग्राम सभा तक की बेनाप भूमि के लिए वन भूमि हस्तांतरण की तरह ही प्रक्रिया पूरी करनी होगी, जब केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय अनुमति देगा, तभी इस जमीन पर कोई विकास कार्य शुरू हो पाएगा।
ब्रिटिश दौर में 1893-नोटिफिकेशन जारी हुआ था। इसमें राज्य में जो भी बेनाप भूमि थी, उसको इंडियन फारेस्ट एक्ट-1878 के तहत लाते हुए संरक्षित वन भूमि घोषित कर दिया गया। ऐसे में ग्राम सभा तक की बेनाप भूमि के लिए वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया को पूरा करना होता था।
इन योजनाओं पर पड़ सकता है प्रभाव
2011 में तत्कालीन खंडूडी सरकार ने इसमें लंबी प्रक्रिया और विकास कार्य प्रभावित होने और 1893-नोटिफिकेशन को 118 साल बाद व्यवहारिक न मानते हुए रद कर दिया था। 28 सितंबर 2011 को खंडूड़ी सरकार ने इसका नोटिफिकेशन जारी किया था। उस समय ब्रिटिश कालीन आदेश को रद्द करने पर खूब वाहवाही हुई थी।
इस मामले का हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। न्यायमूर्ति राजीव शर्मा ने आदेश जारी कर खंडूड़ी सरकार के 1893-नोटिफिकेशन को समाप्त करने के आदेश को रद्द कर दिया। आदेश में कहा गया है कि नैनीताल में ज्यूडीशियल कॉम्पलेक्स तक बेनाप भूमि पर बनाया गया है, उसके निर्माण में वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया को पूरा नहीं किया गया है।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देशित किया है कि इस तरह के सभी प्रकरणों में अनिवार्य तौर पर वन भूमि हस्तांतरण (वन संरक्षण अधिनियम-1980) की प्रक्रियाओं को पूरा किया जाए।
इन योजनाओं पर पड़ सकता है प्रभाव
देहरादून। हाईकोर्ट के आदेश से चारधाम आलवेदर रोड प्रोजेक्ट, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन, भराड़ीसैण (गैरसैंण) में निर्माण कार्य समेत कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं पर प्रभाव पड़ सकता है। इसके अलावा कुमाऊं मंडल विकास निगम या लीज पट्टों पर खनन होता है, वहां भी खनन बंद हो सकता है। केवल आरक्षित वन भूमि क्षेत्र जहां पर खनन करने की अनुमति प्राप्त है, वहां पर खनन पर प्रभाव नहीं पड़ेगा।