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जड़ी-बूटी उद्योग से बदल सकती है तस्वीर

Sat, 25 Jan 2014 11:43 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 25 Jan 2014 11:43 AM IST
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herbal industry in uttarakhand

उद्योगों की दौड़ में पिछड़े पर्वतीय जिलों से निर्यातक आगे आ सकते हैं बशर्ते इन निर्यातकों को पर्याप्त अवसर मिल पाएं।

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जैव विविधता के लिए जाने जाते उत्तराखंड में जड़ी बूटी से लेकर सोवनियर उद्योग के पनपने की पूरी संभावना है जिसकी मांग पूरे विश्व में है। मुसीबत यह है कि अभी तक कोई ठोस योजना बनाकर इस पर काम ही नहीं किया गया।

निर्यात की संभावना पर हुए सेमिनार में शुक्रवार को यह मामला उठा और उद्यमियों ने साफ कहा कि जरूरत प्राथमिकता तय करने की है।

2000 एकड़ जमीन चिन्हित
हकीकत यह है कि पर्वतीय जिलों में करीब 2000 एकड़ जमीन उद्योगों के लिए चिह्नित है। यह औद्योगिक क्षेत्र पहले उत्तर प्रदेश के अधीन थे और करीब दो साल पहले उत्तराखंड को हस्तांतरित किए जा चुके हैं।
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इन क्षेत्रों को विकसित करने का जिम्मा सिडकुल पर है पर सिडकुल ने अभी तक कोई कार्ययोजना ही तैयार नही की है।

लघु उद्दोगों बनेगे जरिया
इंडस्ट्रीज एसोसिएशन आफ उत्तराखंड के अध्यक्ष पंकज गुप्ता के मुताबिक निर्यात को कुटीर एवं लघु उद्योगों के जरिए आगे बढ़ाया जा सकता है।

पहले दून का बल्ब उद्योग इस क्षेत्र में आगे था पर इस उद्योग को नवीनतम तकनीक से परिचित ही नहीं कराया गया। इसी तरह पर्वतीय क्षेत्र सोवनीयर उद्योग और जड़ी बूटी में पहचान बना सकता है।

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