उत्तरकाशीः एक दिन बाद ही हेलीकॉप्टर की इमरजेंसी लैंडिंग पर उठे सवाल, हुई थी तीन की मौत
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उत्तरकाशी के आपदाग्रस्त आराकोट बंगाण क्षेत्र में राहत एवं बचाव कार्य के दौरान महज एक दिन के अंतराल में हेलीकॉप्टर क्रैश होने और इमरजेंसी लैंडिंग की घटना से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
दोनों घटनाओं के लिए प्रथम दृष्टया इस क्षेत्र में बगीचों से सेब ढुलान के लिए लगाई गई ट्रालियों के तारों को कारण बताया जा रहा है, लेकिन हेलीकॉप्टरों की उड़ान से पहले इसकी पड़ताल क्यों नहीं की गई और एक हेलीकॉप्टर क्रैश होने के बाद भी इससे बचाव का कोई उपाय क्यों नहीं तलाशा गया या फिर एहतियात क्यों नहीं बरता गया? यह सवाल अभी तक अनुत्तरित हैं।
आराकोट बंगाण क्षेत्र के गांवों में सेब उत्पादन ग्रामीणों की आजीविका का प्रमुख साधन है। यहां बड़े पैमाने पर सेब का उत्पादन होता है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में स्थित सेब के बगीचों से सेब की फसल को निकटवर्ती सड़क तक पहुंचाने के रास्ते दुर्गम और काफी दूरी पर होने के कारण इन क्षेत्रों में ग्रेविटी बेस रोपवे ढुलान का सबसे सस्ता और सुलभ उपाय है।
यही कारण है कि यहां बड़ी संख्या में बगीचों से सड़कों के बीच ग्रेविटी बेस रोपवे लगे हैं। इसमें ऊंचाई वाले बगीचे और सड़क पर स्तंभ खड़े कर इनके बीच तार पर ट्रॉली के माध्यम से सेब का ढुलान किया जाता है। गत 21 अगस्त को प्रभावित गांवों तक राहत सामग्री पहुंचा रहा हेलीकॉप्टर एक ट्रॉली के तार में उलझकर क्रैश हो गया, जिसमें पायलट व इंजीनियर समेत तीन लोगों की मौत हो गई थी।
ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि राहत बचाव कार्य से पूर्व क्षेत्र में हेलीकॉप्टर उड़ान के लिए सुरक्षित रूट क्यों नहीं तलाशा गया? एक बड़ा हादसा होने के महज एक दिन के अंतराल पर दूसरे हेलीकॉप्टर को भी इन्हीं स्थितियों से दो चार होना पड़ा। भले ही आपात लैंडिंग से बड़ा हादसा टल गया, लेकिन इसने हेलीकॉप्टरों की उड़ान के तौर तरीकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आपात स्थिति में हेलीकॉप्टरों को बिना ठोस तैयारी और रूट की पड़ताल किए जोखिम में धकेलने से न सिर्फ जानमाल का नुकसान हुआ, बल्कि किसानों द्वारा सेब ढुलान के लिए बनाई गई ग्रेविटी बेस रोपवे पर भी तोहमत लग रही है। जानकारों का कहना है कि यदि हेलीकॉप्टरों की उड़ान से पूर्व इन ट्रॉलियों के तार खोल दिए जाते या फिर उड़ान के लिए सुरक्षित रूट चिह्नित किया जाता तो ये हादसे नहीं होते। नागरिक उड्डयन निदेशालय की टीम इन हादसों की पड़ताल के लिए क्षेत्र में पहुंच चुकी है।
तीसरे राउंड में काफी नीचे उड़ा था हेलीकॉप्टर
शुक्रवार को नगवाड़ा टिकोची के पास दुर्घटनाग्रस्त हुए हेलीकॉप्टर को लेकर प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि आराकोट से चिवां के बीच पहले दो राउंड में यह हेलीकॉप्टर काफी ऊंचाई से उड़ा था, जबकि तीसरे राउंड में इसने मोल्डी की ओर से होते हुए काफी नीची उड़ान भरी थी। संभवत: यही हादसे का कारण बनी। हालांकि 21 अगस्त को हेलीकॉप्टर क्रैश के अगले दिन ही डीजीसीए की टीम मौके पर पहुंचकर मामले की पड़ताल में जुटी है। जांच के बाद ही हादसे के कारणों का पता चल पाएगा।
हेली रेस्क्यू से पहले पायलट रेकी कर स्वयं सुरक्षित रूट और हेलीपेड की पड़ताल करते हैं। उनके सुझावों के आधार पर जरूरी सुधार किए जाते हैं। आराकोट क्षेत्र में भी आराकोट, माकुड़ी एवं किराणू में बनाए गए अस्थायी हेलीपैड पर पायलट के सुझाव के अनुसार सुधार कराए गए थे। दुचाणू का हेलीपैड असुरक्षित होने के कारण वहां लैंडिंग नहीं करा गई। ट्राली के तारों को लेकर एविएशन की ओर से कोई आपत्ति नहीं जताई गई थी। डीजीसीए की टीम द्वारा हादसों के कारणों की पड़ताल की जा रही है। इसकी रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में कार्रवाई की जाएगी।
-डा.आशीष चौहान, डीएम उत्तरकाशी