तो क्या ‘हिम युग’ की तरफ बढ़ रहा है उत्तराखंड!
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उत्तराखंड में कहीं ओले पड़ रहे हैं तो कहीं 20-22 साल बाद अधिक मात्रा में बर्फबारी देखने को मिल रही है। इतना ही नहीं कई गांवों में लोगों ने दो दशक बाद बर्फबारी देखी है। विशेषज्ञ इसे जलवायु परिवर्तन से जोड़कर देख रहे हैं। उनकी मानें तो 20 हजार साल का चक्र पूरा कर ‘आइस एज’ यानी हिम युग लौटने वाला है।
विशेषज्ञों के मुताबिक हिम युग लौटने में चार सदी यानी साढ़े 400-500 साल लग सकते हैं। इसी वजह से साल-दर-साल मौसम में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है।
वाडिया हिमालयन भू-विज्ञान संस्थान से हाल ही में सेवानिवृत्त और मानसून, मौसम पर कई किताबें लिख चुके वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. विनोद चंद्र तिवारी के अनुसार उत्तराखंड के परिप्रेक्ष्य में बात करें तो कई साल बाद बर्फबारी का चरम है।
यह जलवायु परिवर्तन का असर है। यह भी दर्शाता है कि जलवायु संतुलन बिगड़ रहा है। चीन में जबरदस्त बर्फबारी होने, मुंबई के पास नासिक में बड़ी मात्रा में ओले गिरने जैसी घटनाओं को भी वह हिम युग के लौटने से जुड़ा बताते हैं।
स्थानीय कारकों का प्रभाव यह बर्फ...
उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यू-सैक) की विशेषज्ञ डॉ. आशा की मानें तो अबकी अधिक मात्रा में बर्फबारी स्थानीय कारकों का प्रभाव हो सकता है। मसलन, पश्चिमी विक्षोभ, हवाओं का रुख आदि। इसे जलवायु परिवर्तन से जोड़कर नहीं देखा जा सकता।
अगर बर्फबारी किसी क्षेत्र में 20-21 साल बाद अच्छी हुई है तो यह भी देखना होगा कि उससे पहले उतनी बर्फबारी कब हुई थी? यह मौसमी चक्र हो सकता है। जलवायु परिवर्तन तभी माना जा सकता है, जब साल-दर-साल लगातार बदलाव देखने को मिले। एक साल के आधार पर किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता।
7-8 साल रहे सिलसिला तभी बदलाव
वाडिया हिमालयन भू-विज्ञान संस्थान के ग्लेशियर विशेषज्ञ डॉ. डीपी डोभाल के अनुसार केवल एक वर्ष अधिक बर्फबारी को किसी बदलाव के नजरिये नहीं देखा जा सकता। अगर 7-8 साल यह सिलसिला कायम रहे तभी इसे किसी तरह के परिवर्तन की श्रेणी में रखा जा सकता है।
जहां इस वक्त बर्फ गिर रही है, वहां पहले भी बर्फ गिरती रही होगी। उसकी मात्रा और वह कहां तक पड़ी है, इसमें जरूर अंतर हो सकता है। यह बड़ी बात नहीं। इससे स्नो लाइन पर किसी तरह के अंतर की बात से उन्होंने इंकार किया।
यहां टूटे चार दशक पुराने रिकॉर्ड
नैनीताल, पिथौरागढ़, कौसानी गरुड़ समेत कुमाऊं में कई हिस्सों में भारी हिमपात। बागेश्वर में 46 साल बाद, चंपावत में 23 साल बाद तो पिथौरागढ़ और डीडीहाट में नौ साल बाद गिरी बर्फ। अल्मोड़ा में बर्फबारी के करीब चार दशक पुराने रिकॉर्ड टूट गए हैं। नगर क्षेत्र में लगभग एक फीट बर्फ गिरी है।
इससे पहले 1970 के दशक में इतनी भारी बर्फबारी हुई थी। सोमवार को अल्मोड़ा का तापमान माइनस एक रिकार्ड किया गया। चंडाक में चार इंच, मुनस्यारी में आठ इंच बर्फ। आसपास की सभी पहाड़ियां बर्फ से लकदक।
मुनस्यारी में जमकर हुआ हिमपात। नैनीताल में भी रविवार रात हुआ मौसम का पहला हिमपात। आधे से एक फीट तक जमी बर्फ। ओखलकांडा ब्लाक में हरीशताल समेत आसपास के गांवों में ओलावृष्टि से मटर, सरसों, प्याज की फसल नष्ट, काश्तकार परेशान हैं।
नैनीताल में एक फीट तक जमी बर्फ
नैनीताल में ओले बर्फ का संदेश ही नहीं बल्कि इस बार बर्फ भी साथ लाए। रविवार देर रात में नैनीताल में मौसम का पहला हिमपात हुआ। नगर, आसपास की सभी पहाड़ियां बर्फ से ढक गई हैं। कई इलाकों में आधे से एक फीट तक बर्फ जमी।
खूबसूरत पहाड़ियों और तलैया के बीच में बसे शहर की चमक-दमक देखने के लिए सुबह से पर्यटकों की भीड़ रही। करीब दो दशक बाद दिसंबर पहले पखवाड़े में भारी हिमपात हुआ है। रात में ओलों की बारिश के बाद पानी से बरसता रहा और फिर बर्फ गिरनी शुरू हुई।
अधिकतम तापमान 7 डिग्री और न्यूनतम तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। 24 घंटे के भीतर नगर, आसपास के इलाकों में 118 मिमी बारिश हुई है। नैनापीक, लड़ियाकांटा, कैमल्स बैक, डोरथीसीट, लैंसएंड, अयारपाटा, टिफिनटॉप, बिड़ला, किलबरी, स्नोव्यू आदि ऊंची चोटियां सफेद हो गई हैं।
बर्फ में फिसलने से कई लोग चोटिल भी हुए। जबकि किलबरी, स्नोव्यू, हिमालय दर्शन आदि मार्गों में पर्यटकों की भीड़ की वजह से दिनभर जाम लगा।