सीएम रावत के स्टिंग मामले में छह सप्ताह बाद होगी सुनवाई
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मुख्यमंत्री हरीश रावत के स्टिंग ऑपरेशन की सीबीआई जांच के दायरे में अन्य लोगों को भी शामिल करने को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट अब अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद करेगा।
बुधवार को मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। देहरादून निवासी रघुनाथ सिंह नेगी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि मार्च 2016 में विधायकों की खरीद फरोख्त संबंधी स्टिंग मामले में सीबीआई केवल मुख्यमंत्री हरीश रावत की सीबीआई जांच कर रही है।
इस स्टिंग मामले में द्वाराहाट विधायक मदन बिष्ट, तत्कालीन मंत्री हरक सिंह रावत और समाचार प्लस के उमेश शर्मा की भी सीबीआई जांच होनी चाहिए।
स्टिंग ने उत्तराखंड की राजनीति में मचाया था भूचाल
उल्लेखनीय है कि मार्च 2016 में मुख्यमंत्री हरीश रावत एक स्टिंग मामले में फंस गए थे। देहरादून में ही इस स्टिंग के सार्वजनिक होने के बाद मुख्यमंत्री पर विधायकों की खरीद फरोख्त का आरोप लगा था। इस मामले की सीबीआई जांच का भी ऐलान किया गया था। बाद में हरक सिंह रावत ने दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस कर इस स्टिंग की सीडी को भी जारी किया था।
इसके बाद द्वाराहाट विधायक मदन बिष्ट भी एक इसी तरह के मामले में फंसे। प्रदेश सरकार ने देहरदून में विशेष कैबिनेट बुलाकर सीबीआई जांच वापस लेने का केंद्र से आग्रह किया था और प्रदेश स्तर पर जांच के लिए एसआईटी गठित करने का फैसला किया था। सीबीआई जांच वापस लेने का एक अन्य मामला भी हाईकोर्ट में विचाराधीन है।