अमेरिका में दिवंगत हुए एल्पर्ट तारों में खोजते थे अपनी मां, बाबा नीब करौरी ने बदला उनका जीवन
- नीब करोरी महाराज पर चर्चित किताब मिरेकल ऑफ लव के लेखक भी हैं डा. एल्पर्ट रामदास
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दो दिन पहले अमेरिका में दिवंगत हुए हार्वर्ड विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर और विख्यात मनोचिकित्सक डा. एल्पर्ट रामदास 1967 में जब बाबा नीब करौरी महाराज से मिले तो उसके बाद उनकी जिंदगी ही बदल गई। डा. एल्पर्ट अपनी मां को बहुत प्यार करते थे। मां के निधन से वह बहुत बेचैन हो गए थे। रात में वह तारों की तरफ देखकर यही सोचते रहते थे कि इन्हीं में से एक तारा उनकी मां भी है।
एल्पर्ट रामदास ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि नीब करौरी महाराज ने उन्हें पहली मुलाकात में ही यह बात बता दी कि उनके दिल में मां के लिए क्या बात चल रही है। इस पर डा. एल्पर्ट बाबा जी के गले लगकर खूब रोये। बाबा जी से मिलने के बाद उन्हें असीम शांति का अनुभव हुआ। इसके बाद प्रो. एल्पर्ट ने बाबा जी को अपना गुरु बना लिया।
उसके बाद करीब डेढ़ साल तक बाबा जी के सानिध्य में रहकर उन्होंने दीक्षा ली और योग आदि भी सीखा। उन्होंने हिंदू धर्म अपनाने के साथ ही हिंदू धर्म के बारे में काफी अध्ययन किया। करीब डेढ़ साल बाद वह अमेरिका लौटे और उन्होंने अमेरिका में हनुमान फाउंडेशन, सेवा फाउंडेशन, नीब करौरी बाबा की स्मृति में लव सर्व रिमेंबर फाउंडेशन स्थापित कर लोगों के स्वास्थ्य लाभ और अन्य तरह के सेवा कार्य किए।
एल्पर्ट रामदास ने 15 किताबें लिखी हैं। इनमें कई पुस्तकें काफी चर्चित रही हैं। बाबा जी के बारे में लिखी गई मिरेकल ऑफ लव पुस्तक काफी चर्चित रही है। इस पुस्तक में नीब करोरी बाबा से जुड़ी घटनाओं का वर्णन है। यह पुस्तक पहली बार 1979 में न्यूयॉर्क में प्रकाशित हुई। उसके बाद रामदास ने 1995 में पुस्तक का नया अंक दोबारा हनुमान फाउंडेशन के माध्यम से प्रकाशित कराया।
एल्पर्ट रामदास को अमेरिका में कई पुरस्कार भी मिले हैं। 1996 में अमेरिका में शुरु किया गया उनका रेडियो टॉक कार्यक्रम हेयर एंड नाउ विद रामदास काफी चर्चित हुआ। 1997 में उन्हें लकवा पड़ गया जिससे उनका भ्रमण करना काफी कम हो गया लेकिन आखिरी दिनों में भी वह अपनी वेबसाइट आदि के जरिये हिंदू धर्म के प्रचार प्रसार के लिए काम करते रहे।
हार्वर्ड विवि में मनोविज्ञान के प्रोफेसर थे डा. एल्पर्ट रामदास
डा. एल्पर्ट का जन्म 1931 में हुआ। उच्च शिक्षा के बाद वह कैलिफोर्निया और वर्कले विवि में विजिटिंग प्रोफेसर रहे। फिर हार्वर्ड विवि में स्थाई रूप से मनोविज्ञान के प्रोफेसर बन गए। 1963 में उन्होंने हार्वर्ड विवि से इस्तीफा दे दिया।
प्रो. डॉ. रिचर्ड एल्पर्ट का निधन बाबा के भक्तों के लिए बड़ी क्षति
नीब करौरी महाराज के अनन्य भक्त प्रो. डॉ. रिचर्ड एल्पर्ट (संत रामदास) का निधन उनके भक्तों के लिए बहुत बड़ी क्षति है। कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केएस राना कहते हैं कि उनके निधन से बाबा से जुड़े अनेक अनछुए पहलू याद आ रहे हैं।
संयोगवश नीब करौरी महाराज की पुत्री गिरिजा भटेले की पुत्रवधू डॉ. सारिका भटेले ने मेरे निर्देशन में पीएचडी की थी। हाल में वे अपने पति, बाबा के नाती वायुसेना में पायलट संदीप भटेले के साथ नैनीताल स्थित मेरे आवास पर आए तो रामदास सहित बाबा के जीवन के तमाम पहलुओं पर चर्चा हुई। बाबा के दो पुत्र और एक पुत्री हैं। पुत्र नेग सिंह शर्मा सीए और धरम नारायण वन अधिकारी रहे।