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रावत के लिए अब और तीखा होगा कुनबे को न संभाल पाने का सवाल

Thu, 19 Jan 2017 12:37 PM IST
सुधाकर भट्ट/ अमर उजाला, हल्द्वानी
सुधाकर भट्ट/ अमर उजाला, हल्द्वानी Updated Thu, 19 Jan 2017 12:37 PM IST
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harish rawat will facing problem to manage congress
सीएम हरीश रावत - फोटो : file photo

पहले उत्तराखंड के नौ कांग्रेस नेता, फिर रेखा आर्या, इसके बाद यशपाल आर्य और अब एनडी भी भाजपा के हो गए।

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आंध्र प्रदेश के राज्यपाल पद से विदाई के बाद अपनों के बीच बेगाने हुए पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी का भाजपाई हो जाना मुख्यमंत्री हरीश रावत को भी कुछ हद तक परेशान करेगा। रावत की ओर अपने कुनबे को न संभाल पाने का सवाल अब और जोर से उछलेगा।

एनडी का भाजपा में जाना कांग्रेस के लिए अप्रत्याशित नहीं था। दो साल उत्तर प्रदेश में खुद को व्यस्त रखने वाले तिवारी परिवार का भाजपा का दामन थाम लेना कुछ समय पहले ही तय हो गया था। इतना जानते हुए भी कांग्रेस ने न तिवारी को मनाने की कोशिश की और न उन्हें गंभीरता से बात करना सही समझा।
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कांग्रेस नेताओं की नजर में तिवारी अब शायद थके मांगे सियायतदां हैं। इतना होते हुए भी कांग्रेस से विदा होते-होते एनडी मुख्यमंत्री हरीश रावत को सवालों को घेरे में ले ही आए। एनडी ने कांग्रेस से विदाई का वक्त भी उस समय चुना जब उनके शिष्य माने जाने वाले यशपाल आर्य भी कांग्रेस को अलविदा कह चुके थे। ऐसे में रावत की ओर अब अपना कुनबा न संभाल पाने का सवाल तिवारी समर्थक उठा सकते हैं।
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तिवारी और हरीश रावत की कैमिस्ट्री वैसे भी कभी मैच नहीं कर पाई। तिवारी प्रदेश के पहले कांग्रेसी मुख्यमंत्री बने और उनके कार्यकाल में हरीश रावत कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे। दोनों के बीच अघोषित झगड़ा लगातार कायम रहा। वैसे तिवारी पिछले कुछ समय से कांग्रेस परिवार के सदस्य न के बराबर ही रह गए थे।


आंध्र प्रदेश से लौटकर देहरादून पहुंचने पर तिवारी से कांग्रेस नेताओं का मिलना-जुलना लगातार कम होता गया। प्रदेश में कांग्रेस उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान हुए विकास की दुहाई देकर चुनाव लड़ती रही और एनडी से उतनी ही शिद्दत के साथ दूरी बनाकर भी रही। तिवारी इसके बाद उत्तर प्रदेश पहुंचे तो यह दूरी और बढ़ गई। 2017 के चुनाव की बयार बहने के बाद तिवारी उत्तराखंड लौटे तो भी दूरी लगातार कायम रही।

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