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उत्तराखंड: पूर्व सीएम हरीश रावत बोले-2027 का चुनाव उत्तराखंडियत बचाने का आखिरी मौका, सरकार पर साधा निशाना
Tue, 22 Sep 2026 07:55 PM IST
Renu Saklani
माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून
माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून
Published by: Renu Saklani
Updated Tue, 22 Sep 2026 07:55 PM IST
सार
विधानसभा चुनाव को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बड़ा मुद्दा उठाया है। उन्होंने सरकार के विकास मॉडल पर सवाल खड़े करते हुए उत्तराखंडियत, मूल आंदोलनकारियों और वंचित वर्गों के अधिकारों की बात कही।
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पूर्व सीएम हरीश रावत
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
2027 के चुनाव उत्तराखंडियत बचाने का आखिरी मौका है, यह कहना है प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का। उन्होंने यह बात उत्तराखंड के गांधी इंद्रमणि बडोनी एवं बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की मूर्ति पर माल्यार्पण करते हुए कही। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, राज्य अपने निर्माण के ढाई दशक पार कर 27 वें वर्ष की ओर बढ़ रहा है, लेकिन 2027 का आगामी विधानसभा चुनाव उत्तराखंड के अस्तित्व, उत्तराखंडियत और वंचितों की आवाज का टर्निंग प्वाइंट साबित होगा।
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उन्होंने कहा, पिछले 10 साल में कोई ऐसा काम नहीं हुआ, जिससे प्रदेशवासी गर्व महसूस कर सकें। आज दो-अभी दो और कोदो-झंगोरा खाएंगे, उत्तराखंड बनाएंगे का नारा देने वाले मूल आंदोलनकारी और दूर-दराज के ग्रामीण आज भी हाशिए पर हैं। प्रदेश की 70 से 75 प्रतिशत जनता (धारचूला-मुनस्यारी से लेकर जसपुर-गंगोत्री तक) अभी भी बुनियादी अधिकारों और संसाधनों से वंचित है, मात्र 25 से 30 प्रतिशत लोगों की ही पहुंच संसाधनों तक सिमटकर रह गई है। उन्होंने कहा, यदि 2027 में जनता बदलाव के पक्ष में खड़ी न हुई, तो राज्य आंदोलन की मूल भावना समाप्त हो जाएगी।
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गरीब, बेरोजगार और प्रशासनिक-भ्रष्टाचार पीड़ित जनता की आवाज दबी रह जाएगी। उन्होंने स्व. इंद्रमणि बडोनी और बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर को नमन करते हुए कार्यकर्ताओं और समर्थकों का आह्वान किया कि वे व्यवस्था परिवर्तन और शोषित-वंचित वर्ग के अधिकारों की लड़ाई के लिए सड़क से सदन तक संघर्ष का संकल्प लें।