अफसरों से बोले रावत, 'मेरे पास ज्यादा समय नहीं'
- पहले ही दिन दिखाए तेवर, कैबिनेट के साथ दिल्ली पहुंचे
- पुलिस के कान उमेठे, राज्यपाल के समय का शिक्षा विभाग का फैसला वापस
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कार्यभार संभालते ही मुख्यमंत्री हरीश रावत के तेवर तल्ख होते दिखे। उन्होंने पहले कैबिनेट बैठक कर सरकार की विधिवत शुरूआत की, इसकेबाद मुख्य सचिव समेत सभी ब्यूरोक्रेट्स की बैठक में अपना एजेंडा समझाते हुए स्पष्ट किया कि काम में तेजी लाइए, क्योंकि अब मेरे पास समय नहीं है।
इसके बाद उन्होंने पुलिस विभाग के कान उमेठे। फिर पूरे मंत्रिमंडल के साथ राज्यपाल से मुलाकात शिष्टाचार मुलाकात कर दिल्ली हाईकमान से मिलने के लिए रवाना हो गए।
वैसे तो हरीश रावत बीती मध्य रात्रि में ही मुख्यमंत्री के पद पर बहाल हो गए थे, लेकिन गुरुवार को उनके दिन की शुरूआत तल्ख तेवरों के साथ हुई। उन्होंने तेजी से काम शुरू भी किया। बगैर एजेंडे की कैबिनेट बैठक बुलाकर पुराने फैसले को लागू करने की हिदायत दी।
राज्यपाल के फैसलों का कर सकते हैं रिव्यू
शासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में स्पष्ट कहा कि मेरे पास ज्यादा समय नहीं है, इसलिए कामकाज में तेजी आनी चाहिए। हरीश ने राज्यपाल के शासन के शिक्षकों के तबादले के फैसले को भी पलट दिया।
सूत्रों की माने तो उन्होंने राज्यपाल शासन के दौरान लिए गए सभी फैसलों का रिव्यू करने की अपनी मंशा भी जता दी। सभी विभागों से फैसलों की सूची तलब की है। फिर पुलिस विभाग की बैठक बुलाई और कहा कि हाथ पर हाथ रखकर मत बैठो, कुछ करो, ताकि अपराधियों में भय व्याप्त हो।
कई मुद्दों पर बैठक और मशक्कत के बाद हरीश रावत पूरे मंत्रिमंडल के साथ राज्यपाल डॉ. कृष्णकांत पाल से मिलने राजभवन पहुंचे। फिर आए और शासन में मामूली फेरबदल कर सचिव एमसी जोशी से गोपन, उच्च शिक्षा व वित्त विभाग वापस ले लिया। यह गोपन अब प्रमुख सचिव राधा रतूड़ी देखेंगी और इस विभाग के अपर सचिव विनय शंकर पांडेय होंगे। मुख्यमंत्री इसके बाद पूरी कैबिनेट के साथ दिल्ली रवाना हो गए।