बोले सीएम, 6 माह में मांग न पूरी की तो सुना देना
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राज्य में कार्य की संस्कृति खत्म होती जा रही है। बात-बात पर कर्मचारी हड़ताल करने लगते हैं। आप हड़ताल छोड़कर छह महीने सरकार की मदद कीजिए। आपकी सभी मांगें पूरी कर दूंगा। ऐसा नहीं किया तो सातवें महीने मुझे सुना देना, लेकिन छह महीने तो लगकर काम करिए।
यह बात मंगलवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मंगलवार को पेयजल तकनीकी और फील्ड कर्मचारी संगठन (जल संस्थान) के छठे प्रांतीय महाधिवेशन में कही।
नगर निगम टाउन हाल में मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि आपदा के बाद राज्य को पटरी पर लाने में सहयोग कर काम का माहौल बनाएं। राजकीयकरण की मांग पर भरोसा दिया कि कर्मचारी नेता अपने स्तर से रास्ता निकाल कर प्रस्ताव लाएं। छह महीने बाद सभी मांगें मान लूंगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पेयजल निगम का निगम हटेगा और जल संस्थान का संस्थान हटाया जाएगा। इसके बाद पेयजल का एक विभाग जल विभाग बनाया जाएगा। मौके पर पेयजल मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी, जल संस्थान मुख्य महाप्रबंधक एसके गुप्ता, महाप्रबंधक एसके शर्मा, अधिशासी अभियंता एसएल जुयाल, पूरन चंद, ह्देश चंदेल, टीएस मिश्रा, श्याम लाल आदि रहे।
..तो ही आएगा पत्नी का लहंगा
सीएम ने कार्यक्रम में कहा कि पिता की जेब में पैसा होगा तो ही बच्चों की स्कूल की फीस भरी जाएगी और पत्नी के लिए लहंगा आएगा। आप कमा कर दीजिए, आपकी सभी मांगें मान ली जाएंगी। उन्होंने वेतन विसंगति समेत कर्मचारियों की सभी मांगों को छह माह में पूरा करने का आश्वासन दिया।
लैप्स हो रहा केंद्र का पैसा
पेयजल योजनाओं के लिए केंद्र से मिलने वाला फंड खर्च नहीं करने पर सीएम ने कड़ी नाराजगी जताई। कहा कि केंद्र पैसा राज्य में लैप्स हो रहा है। विभाग काम नहीं कर रहे हैं। वह पैसे इस्तेमाल करें तो आपको लगेगा कि हम बेवजह सीएम से पैसा मांग रहे हैं।
मंत्री जी, तो हैंडपंप लेकर दौड़ना न पड़ता
मुख्यमंत्री ने मंच से पेयजल मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी से पूछा कि राज्य में कितना क्षेत्र वाटर लाइन से अछूता होगा। मंत्री ने कहा कि पचास प्रतिशत तो सीएम बोले, नहीं अधिक ही होगा।
कहा, अगर पचास प्रतिशत जगह भी वाटर लाइन बिना है तो बेहद शर्मनाक है। लोगों को सुविधा ही नहीं मिलेगी तो कमाई कैसे होगी। सभी जगह सुविधा देकर कमाई हो रही होती तो मंत्री जी आपका झोला भरा होता। आपको हैंडपंप लेकर जगह-जगह दौड़ना ना पड़ता।