'पड़ोसी' ने बढ़ाई उत्तराखंड के मुख्यमंत्री की परेशानी
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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत के बीजापुर आवास के ठीक बगल में रहने वाले उनके पड़ोसी पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने उन्हें परेशानी में डाल दिया है।
पीडीएफ मंत्रियों को मंत्रिमंडल से हटाने के लिए एक स्वर में बोल रहे प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय और विजय बहुगुणा की गुरुवार को हुई मुलाकात कांग्रेस में नए समीकरण पैदा कर सकते हैं।
पीडीएफ मंत्रियों के खिलाफ प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय के बयान पर अपनी मुहर लगाकर विजय बहुगुणा ने उनका ह्दय परिवर्तन कर दिया। बताते हैं कि बहुगुणा से मिलने की पहल किशोर उपाध्याय की ओर से ही की गई। गुरुवार शाम किशोर उपाध्याय और बहुगुणा की मुलाकात सर्किट हाउस में हुई।
'नववर्ष की शुभकामनाएं देने गए थे किशोर'
किशोर उपाध्याय का कहना है कि उन्हें जानकारी मिली कि पूर्व मुख्यमंत्री देहरादून में है लिहाजा उन्हें और परिवार को नववर्ष की शुभकामनाएं देने गए थे।
दरअसल मुख्यमंत्री ने केंद्रीय नेतृत्व केसामने जो खाका तैयार कर पेश किया था उसमें लगभग सभी पीडीएफ मंत्रियों को कांग्रेस में शामिल कराने की तैयारी थी। हरीश दुर्गापाल को लेकर आए तकनीकी पेंच के बाद ऐसा नहीं हो सका।
दुर्गापाल के बाद मंत्री दिनेश धनै और मंत्री प्रसाद नैथानी की वापसी होनी थी। दिनेश धनै प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय को हराकर ही विधानसभा पहुंचे थे। किशोर उपाध्याय कतई नहीं चाहेंगे कि उनकी राजनीतिक जमीन जाए।
इसी तरह शूरवीर सजवाण मंत्री प्रसाद नैथानी का कांटा बने हैं। धनै को लेकर बहुगुणा का दर्द है कि लोकसभा चुनाव में टिहरी से लड़े साकेत बहुगुणा के चुनाव में उन्होंने खिलाफत की।
पार्टी लीडरशिप तय करेगी किसका समर्थन लेना है किसका नहीं। मंत्रिमंडल के सभी मंत्री अच्छा काम कर रहे हैं। सुरेंद्र राकेश भी अच्छा काम कर रहे हैं।
- हरीश रावत, मुख्यमंत्री