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अब उत्तराखंड के युवाओं के हित में काम करेंगे न्यूजीलैंड से लौटे पुरोहित

Mon, 07 Nov 2016 01:10 PM IST
अमरनाथ/ अमर उजाला, हल्द्वानी
अमरनाथ/ अमर उजाला, हल्द्वानी Updated Mon, 07 Nov 2016 01:10 PM IST
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harish purohit will work for uttarakhand
harish

न्यूजीलैंड में रहकर हॉस्पिटैलिटी के क्षेत्र में 13 वर्ष का अनुभव हासिल करने के बाद हरीश पुरोहित जल्द ही उत्तराखंड के युवाओं को कुशल बनाने का काम करेंगे। वह साढ़े तीन वर्ष के बाद ट्रेनिंग प्रोग्राम लेकर जनवरी में हल्द्वानी आ रहे हैं।

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इसके साथ ही वह कैफे की चेन खोलकर भट्ट, गहत, झिंगोरे आदि कुमाऊंनी उत्पादों से फ्यूजन डिश बनाने की तैयारी कर रहे हैं। न्यूजीलैंड की डेलावेयर नार्थ कंपनी में बतौर बिजनेस मैनेजर कार्यरत हल्द्वानी निवासी हरीश को उनके उम्दा कार्य के लिए हाल ही में लगातार दूसरे साल टॉप हॉस्पिटैलिटी का अवार्ड मिला है।
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मूल रूप से रानीखेत के हरीश (35) ने हल्द्वानी के बीरशिबा स्कूल से 12वीं करने के बाद रुहेलखंड विश्वविद्यालय बरेली से हॉस्पिटैलिटी में स्नातक किया। उच्च शिक्षा उन्होंने न्यूजीलैंड की वेलटेक यूनिवर्सिटी से पूरी की। मध्यम वर्गीय परिवार और हल्द्वानी जैसे छोटे शहर में पले-बढ़े होने के बावजूद वह अपनी मेहनत के दम पर अभी 42 लाख का सालाना पैकेज पा रहे हैं।
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वेलिंगटन से फोन पर बातचीत में उन्होंने बताया कि लंबे संघर्ष के बाद वह इस मुकाम पर पहुंचे हैं। पिता प्रयाग दत्त पांडे ने उन्हें पढ़ाने के लिए पुश्तैनी मकान को गिरवी रख दिया था। अब स्थिति सुधरने के बाद वह उत्तराखंड सरकार व कुछ अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ मिलकर युवाओं के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू करना चाहते हैं।

हरीश गांधीवादी विचारधारा से प्रेरित हैं

harish purohit will work for uttarakhand
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी

गांधीवादी विचारधारा से प्रेरित हरीश ने बताया कि विगत माह हल्द्वानी से वेलिंगटन टूर पर पहुंचे श्यामा गार्डन के मालिक मोहित चंद्र ने कैफे चेन में उनका साथ देने का मन बनाया है। हिमांशु देउपा समेत कई युवाओं को विदेश में नौकरी दिला चुके हरीश ने शादी के सवाल पर कहा कि मां-पिता की पसंद की कुमाऊंनी लड़की से करेंगे। हरीश के भाई मनोज पुरोहित ने बताया कि यहां वह उनके काम में हाथ बंटाएंगे।

न्यूजीलैंड के नागरिक बनने के बाद भी हरीश को उत्तराखंड से बेहद लगाव है। अब तक की कामयाबी का श्रेय पिता को देते हुए हरीश कहते हैं कि वतन के लिए काम करने के पीछे उनका उद्देश्य उत्तराखंड को दुनिया के नक्शे पर शीर्ष पर्यटन स्थलों में शामिल कराना है। उनका कहना है कि संसाधनों के सही इस्तेमाल से पर्यटकों के लिए उत्तराखंड दर्शन को आसान और रोमांचक बनाया जा सकता है। 
 
पिता बोले, हरीश लंबी रेस का घोड़ा  
हरीश के पिता प्रयाग दत्त पुरोहित 45 साल से हल्द्वानी में एमबी कॉलेज के पास जनरल स्टोर चला रहे हैं। इससे ही उन्होंने अपने चार बच्चों की शिक्षा पूरी कराई। बेटे को पढ़ाई के लिए विदेश भेजने के सवाल पर उन्होंने कहा ‘मुझे हमेशा से ही लगता था कि हरीश लंबी रेस का घोड़ा है जो दौड़ में जरूर जीतेगा, इसलिए मैंने अपने पैतृक मकान को गिरवी रखकर कर्ज लिया और उसे विदेश भेजा’। उन्होंने बताया कि विदेश में रहते हुए भी वह नियमित रूप से संध्या पूजन करता है। उसने हाथ में गायत्री मंत्र का टैटू भी गुदवाया है। मां भगवती पुरोहित का कहना है कि हरीश बचपन से ही पढ़ाई में लगनशील रहा है और अब भी साधारण तरीके से ही रहता है। (तृप्ति भंडारी के इनपुट के साथ)

नैनीताल जैसी ही न्यूजीलैंड के वेलिंगटन की आबोहवा  
हरीश ने फोन पर बताया कि इन दिनों न्यूजीलैंड में भी दिल्ली के बढ़ते प्रदूषण स्तर खूब चर्चा हो रही हैं। हालांकि नैनीताल के बारे में वहां के लोग जुदा राय रखते हैं। उन्होंने बताया कि नैनीताल और वेलिंगटन की आबोहवा और प्राकृतिक खूबसूरती एक जैसी है। यहां के लोग भी जरूरतमंदों की हर तरह से मदद के लिए तैयार रहते हैं। उन्होंने बताया कि जुर्माने का प्रावधान न होने के बावजूद न्यूजीलैंड के लोग इतने जागरूक हैं कि अगर कहीं कूड़ा पड़ा होता है तो वे खुद ही उसे साफ कर देते हैं।

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