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हरिद्वार जमीन घोटाला: तीन आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका स्पेशल विजिलेंस जज ने की खारिज, छिपाए थे तथ्य

Mon, 20 Jul 2026 09:31 PM IST
Alka Tyagi माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून
माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून Published by: Alka Tyagi Updated Mon, 20 Jul 2026 09:31 PM IST
सार

आरोप है कि आरोपियों ने मिलीभगत कर कृषि भूमि को अकृषि में बदलवाकर कई गुना दामों पर नगर निगम को खरीदवाया था। इससे नगर निगम को 41 करोड़ रुपये का नुकसान और स्टांप शुल्क की हानि हुई थी।

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Haridwar land scam  Special Vigilance Judge rejects anticipatory bail pleas of three accused
कोर्ट - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

हरिद्वार जमीन घोटाले में जितेंद्र कुमार, सुमन देवी और अभिषेक यादव की अग्रिम जमानत याचिका को स्पेशल विजिलेंस जज अंजलि बेंजवाल की अदालत ने खारिज कर दिया है। तीनों ने तर्क दिया कि वे लोक सेवक नहीं हैं। ऐसे में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का आरोप नहीं बनता है।

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अभियोजन ने इसका विरोध करते हुए दलील दी कि तीनों आरोपियों ने पहले हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी जिसे उन्होंने कोर्ट से छिपाया। इसके अलावा वर्तमान में जांच चल रही है तो अग्रिम जमानत का अधिकार तीनों आरोपी नहीं रखते हैं।
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विजिलेंस ने पिछले दिनों छह सरकारी अधिकारियों और चार लोगों जिन्होंने जमीन बेची थी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। आरोप है कि आरोपियों ने मिलीभगत कर कृषि भूमि को अकृषि में बदलवाकर कई गुना दामों पर नगर निगम को खरीदवाया था। इससे नगर निगम को 41 करोड़ रुपये का नुकसान और स्टांप शुल्क की हानि हुई थी। यह जमीन जितेंद्र कुमार, सुमन देवी और अभिषेक यादव के परिवार से संबंधित थी। इन तीनों ने स्पेशल विजिलेंस कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की थी।
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आरोपियों की ओर से अदालत को बताया गया कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है। वे सरकारी कर्मचारी नहीं हैं और रिश्वत मांगने या लेने का उन पर कोई आरोप नहीं है। जमीन का उपयोग परिवर्तन वैधानिक प्रक्रिया से हुआ है। सभी दस्तावेज जांच एजेंसी के पास पहले से मौजूद हैं। लिहाजा उनकी गिरफ्तारी न की जाए। उन्होंने यह वादा भी किया कि वे जांच में सहयोग करेंगे। उनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है।

इस पर अभियोजन की ओर से कहा गया कि जमीन की वास्तविक कीमत बेहद कम थी। बावजूद इसके नगर निगम को 56.94 करोड़ रुपये में खरीदवाया गया। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत जांच अभी जारी है। तीनों आरोपियों ने पहले हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी जिसे वापस ले लिया था। जबकि, इस तथ्य को उन्होंने वर्तमान याचिका में शामिल नहीं किया। ऐसे में तीनों को अग्रिम जमानत का अधिकार नहीं है। इस पर कोर्ट ने तीनों की याचिका नामंजूर कर दी।

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