कोविड सुपर स्प्रेडर बना कुंभ: 13 महीनों पर भारी पड़े 30 दिन, कई संतों और श्रद्धालुओं ने गंवाई थी जान
कुंभ की विधिवत शुरूआत एक अप्रैल से हुई। 30 अप्रैल तक होने वाले कुंभ को 14 अप्रैल के शाही स्नान के बाद सांकेतिक करना पड़ा। इसकी वजह संक्रमण का अत्यधिक प्रसार रहा। इसके बाद श्रद्धालुओं की संख्या थम गई।
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कोरोनाकाल में कुंभ का आयोजन संक्रमण के प्रसार का बड़ा कारण बना। श्रद्धालुओं की फर्जी निगेटिव कोविड जांच रिपोर्ट के बावजूद कुंभ अवधि के 30 दिन पूरे कोरोनाकाल के 13 महीनों पर भारी रहे। कुंभ अवधि में 17317 पॉजिटिव मरीज मिले थे। जांच रिपोर्ट में खेल नहीं होता तो मरीजों की संख्या कई गुना अधिक हो सकती थी।
हरिद्वार कुंभ: फर्जी टेस्टिंग मामले की उच्चस्तरीय जांच को लेकर सरकार पर दबाव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की अपील पर 27 अप्रैल का आखिरी स्नान भी सांकेतिक हुआ। लेकिन स्वास्थ्य विभाग की कोविड जांच नहीं थमी। मेला स्वास्थ्य विभाग ने 11 निजी लैब को कुंभ अवधि में आने वाले श्रद्धालुओं की कोविड की आरटीपीसीआर और एंटीजन जांच के लिए हायर किया था।
लैबों ने फर्जी तरीके से हजारों उन लोगों की निगेटिव रिपोर्ट जारी कर दी जो कुंभ में आए ही नहीं थे। अखाड़ों के संतों की भी बिना सैंपल के निगेटिव रिपोर्ट जारी कर दी। इसके बाद भी कुंभ के 30 दिनों में नए पॉजिटिव मरीजों की संख्या 17317 पहुंच गई। सैकड़ों लोगों ने जान गवाई। इनमें कई संतों की भी मौत हुई।
संतों और लोगों ने भी संक्रमण की चपेट में आने से जान गंवाई
हरिद्वार कुंभ से लौटकर देश के विभिन्न राज्यों में पहुंचने वाले संतों और लोगों ने भी संक्रमण की चपेट में आने से जान गंवाई। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुंभ आयोजन को कोविड का सुपर स्प्रेडर कहा गया। सरकार से लेकर मेला प्रशासन और संतों को इसके बचाव में उतरना पड़ा। सरकार ने कोविड सुपर स्प्रेडर के दावों को खारिज कर दिया। संतों की ओर से भी इसे हरिद्वार को बदनाम करने की साजिश बताया गया। लेकिन स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों का झुठलाया नहीं जा सकता है।
मार्च 2020 से एक अप्रैल 2021 तक जिले में कुल पॉजिटिव मरीजों की संख्या 14472 थी। तब तक कुल 654807 कोविड जांचें हुई थी और संक्रमण कर दर 2.21 फीसदी थी। यानी 13 महीनों में प्रतिदिन औसतन 37 मरीज मिले थे। लेकिन अकेले अप्रैल माह (कुंभ अवधि) में 17317 नए मरीजों के साथ जिले में पॉजिटिव मरीजों का आंकड़ा बढ़कर 31789 पहुंच गया। कुंभ अवधि में 600831 कोविड जांच हुई थी। जांच रिपोर्ट के फर्जीबाड़े से संक्रमण की दर भले ही 2.88 फीसदी रही, लेकिन औसतन रोजाना 577 नए मरीज आए।
हरिद्वार कुंभ अवधि में संक्रमण की दर 2.88 फीसदी हैरानी वाली थी। इस अवधि में राज्य के अन्य 12 जिलों की औसत संक्रमण की दर 14 फीसदी से अधिक थी। कोविड जांच के इस खेल की अलग-अलग स्तरों पर जांच बैठ गई है। 11 लैब में दो लैब की भूमिका संदिग्ध बनी है। 11 लैबों ने दो लाख 51 हजार कोविड जांचें की थी। इनमें अकेले दो लैब ने एक लाख 23 हजार कोविड जांचें की हैं। इनमें एक लाख जांचें फर्जी होने की आशंका जताई रही है।
कुंभ शुरू होने से पहले और खत्म होने तक कोविड की स्थिति
तारीख- कुल पॉजिटिव मरीज कुल कोविड जांच
01 अप्रैल- 14472 654807
30 अप्रैल- 31789 1255638