अर्द्घकुंभ अपडेटः पहली बार फोटोमीट्रिक पंजीकरण
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पहली बार अर्द्धकुंभ में हुए फोटोमीट्रिक पंजीकरण रिकॉर्ड के मुताबिक मकर संक्रांति पर 14 और 15 जनवरी को कुल एक लाख 12 हजार छियानबे श्रद्धालुओं ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। अर्द्धकुंभ के आगामी स्नान पर्वों पर भी श्रद्धालुओं के लिए निशुल्क फोटोमीट्रिक पंजीकरण की व्यवस्था लागू रहेगी।
चारधाम यात्रा में बाहरी प्रांतों से आने वाले तीर्थयात्रियों का पंजीकरण करने वाली त्रिलोक सिक्योरिटी सिस्टम इंडिया प्रा. लि. ने अर्द्धकुंभ में श्रद्धालुुओं का फोटोमीट्रिक पंजीकरण किया। इसके लिए कंपनी ने हरिद्वार में पंडित दीनदयाल उपाध्याय पार्किंग, गौरी शंकर सेक्टर, रेलवे स्टेशन, पंतद्वीप पार्किंग, बैरागी कैंप और बस अड्डे पर पंजीकरण की व्यवस्था की।
कंपनी के राज्य प्रभारी श्रीनिवास ने बताया कि 2013 की आपदा से सबक लेते हुए चारधाम यात्रा के बाद अर्द्धकुंभ में पहली बार श्रद्धालुओं के फोटोमीट्रिक पंजीकरण की व्यवस्था की गई है। पंजीकरण में प्रत्येक श्रद्धालु का रिकॉर्ड दर्ज रहेगा। उन्होंने बताया कि 13 जनवरी से 15 जनवरी तक हरिद्वार आने वाले 1,12,096 श्रद्धालुओं ने फोटोमीट्रिक पंजीकरण कराया है। राज्य प्रभारी ने बताया कि कुंभ के प्रत्येक स्नान से पहले फोटोमीट्रिक पंजीकरण की व्यवस्था रहेगी।
अर्द्धकुंभ में आश्रमों, धर्मशालाओं को मिले राहत
गंगा में सीवरेज डालने वाले हरिद्वार के आश्रमों, धर्मशालाओं को अर्द्धकुंभ के दौरान राहत मिलने की उम्मीद है। इस संबंध में रियायत के लिए शासन ने एक्शन प्लान में एनजीटी से अनुरोध किया है। अर्द्धकुंभ में देश के विभिन्न प्रांतों के श्रद्धालु इन धर्मशालाओं और आश्रमों में आकर ठहरते हैं। इन आश्रमों और धर्मशालाओं को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नोटिस जारी कर चुका है। एनजीटी ने इन संस्थानों की बंदी का आदेश किया है।
शासन की ओर से तैयार किया गया एक्शन प्लान शनिवार को एनजीटी के समक्ष प्रस्तुत किया जाना था, लेकिन अवकाश के कारण इसे दाखिल नहीं किया जा सका। मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह ने बताया कि महाधिवक्ता सोमवार को एक्शन प्लान दाखिल करेंगे। एनजीटी के आदेशों के मुताबिक शासन ने एक्शन प्लान तैयार करके महाधिवक्ता को दे दिया है। इसमें खासतौर पर हरिद्वार के संबंध में मोहलत दिए जाने का अनुरोध किया गया है।
10 दिसंबर के आदेश में एनजीटी ने स्पष्ट कहा था कि हरिद्वार और ऋषिकेश के जिन होटलों ने 15 सितंबर, 2015 की पब्लिक नोटिस के बाद सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगाया है उन्हें बंद कर दिया जाए। इसके साथ ही धर्मशालाओं और आश्रमों के संबंध में एनजीटी ने पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के संबंध में आदेश किया था।
आदेश में कहा गया था कि पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के रूप में 5000 रुपये प्रतिदिन लिए जाएं। जिन आश्रमों और धर्मशालाओं ने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगाया है, वे आदेश जारी होने के तीन महीने के अंदर प्लांट लगाएं। किसी को भी गंगा में सीवरेज नहीं डालने दिया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इस संबंध में अनुरोध किया गया है, एनजीटी एक्शन प्लान पर दिशा-निर्देश जारी करेगा।
महाकुंभ, अर्धकुंभ क्षेत्र का होगा विस्तार
हरिद्वार में आयोजित होने वाले महाकुंभ और अर्धकुंभ के क्षेत्रों का और विस्तार किया जाएगा। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा है कि महाकुंभ और अर्धकुंभ के क्षेत्रों को देवप्रयाग से आगे तक विस्तार किया जाएगा। ऐसा होने से जहां अर्धकुंभ सीमा क्षेत्र में आने वाले क्षेत्रों का विकास होगा और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे।
अर्धकुंभ-2016 की मेला तैयारियों को लेकर केंद्र से बजट नहीं मिलने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र ने अर्धकुंभ के मद्देनजर 164 करोड़ का बजट अवमुक्त करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अभी तक बजट नहीं मिल पाया है। हालांकि बजट नही मिलने से अर्धकुंभ तैयारियों पर कोई खास असर नही पड़ा है।
राज्य सरकार की ओर से अपने बजट से मेला तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। साथ ही कहा कि यदि केंद्र से समय रहते बजट मिल जाता तो अतिरिक्त घाटों का निर्माण हो जाता, जिससे श्रद्धालुओं को और अधिक सहूलियत होती। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने यह भी कहा है कि अर्धकुंभ की व्यवस्थाओं पर श्रद्धालुओं से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। राज्य सरकार की ओर से 10 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थाएं की गई हैं।
उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने 1931 के मेला एक्ट में संशोधन करते हुए मेला क्षेत्र ऋषिकेश से बढ़ाकर देवप्रयाग तक कर दिया है। अब राज्य सरकार इसे देवप्रयाग से और आगे तक बढ़ाने की योजना बना रही है।