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'15 साल में UP का पिछलग्गू हो गया उत्तराखंड'
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 05 May 2015 10:48 AM IST
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उत्तराखंड के उद्यान एवं कृषि मंत्री हरक सिंह रावत ने एक बार फिर अपने बेबाक बोलों से राज्य की राजनीति में हलचल मचा दि है। चाहे सरकार किसी की भी रही हो, उत्तराखंड के विकास के लिए किसी ने प्लानिंग नहीं की। यहां हर काम राजनीति से प्रेरित रहा है जिसके चलते प्रदेश को नुकसान उठाना पड़ा है।
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पिछले 15 वर्षों में उत्तराखंड यूपी का पिछलग्गू ही रहा है। ये बातें उद्यान एवं कृषि मंत्री हरक सिंह रावत ने जिला पंचायत सभागार में उत्तराखंड तकनीकी कर्मचारी संघ, उद्यान एवं प्रसंस्करण विभाग के द्विवार्षिक अधिवेशन में बतौर मुख्य अतिथि कहीं।
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हरक ने कहा कि यूपी के समय में 40 साल पहले उद्यान विभाग की जो स्थिति थी, विभाग की वही स्थिति उत्तराखंड में आज भी है। विभाग लावारिस की तरह है, इसकी ओर किसी का ध्यान नहीं गया। कहा कि सरकार जिला योजना के लिए 750 करोड़ रुपये अवमुक्त करने जा रही है।
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सड़कों के लिए 45 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं, जबकि उद्यान विभाग की अनदेखी हो रही है। कहा कि बिहार जैसे राज्य भी आज विकास की राह पर हैं, लेकिन उत्तराखंड की सरकारों के पास प्लानिंग ही नहीं है। यहां काम यूपी की तर्ज पर हो रहे हैं।
बेबाक बोल:
सीएम से कहने के बाद भी घूम रही फाइल
हरक सिंह रावत ने कहा कि उद्यान विभाग के ढांचे की स्वीकृति के लिए मुख्यमंत्री से कहा था। सीएम ने अधिकारियों को एक महीने में इसकी स्वीकृति के निर्देश दिए, लेकिन इस बात को पांच महीने हो गए, इसके बाद भी फाइल घूम रही है। मंत्री ने यह भी कहा कि अपनी पीठ थपथपाने के लिए जरूरत न होने के बावजूद इंटर कॉलेज एवं कुकुरमुत्ते की तरह महाविद्यालय खोल दिए गए हैं। कहा कि यूपी से अधिक पॉलीटेक्निक यहां हैं।
सरकारों के चक्कर में न पड़ें
मंत्री हरक ने कहा कि अधिकारी और कर्मचारी सरकारों के चक्कर में न पड़ें। किसकी सरकार है, किसकी आएगी इस चक्कर में न पड़कर कुछ करने का संकल्प लें। कहा कि, काम आप लोगों को करना है सरकार तो एक माध्यम है। यदि सरकारों के बूते प्रदेश व समाज आगे बढ़ता, तो सभी प्रदेश आगे बढ़ चुके होते। मंत्री ने कहा कि कर्मचारी हित में कोई काम करना हो तो अधिकारी नियम कानून बताने लगते हैं, काम करने से डरते हैं, लेकिन गड़बड़ी करने से नहीं डरते।
वे ‘हमें’ मूर्ख समझते हैं...
उद्यान विभाग के पुनर्गठन के शासनादेश एवं कर्मचारियों की पदोन्नति से संबंधित मामलों में देरी की वजह से नाराज उद्यान मंत्री डा. हरक सिंह रावत सचिवालय के अधिकारियों पर जमकर बरसे।
कहा कि मैं अच्छी तरह से जानता हूं कि सचिवालय में किस तरह से शासनादेश जारी होते हैं। बोले, यदि अधिकारियों से सेटिंग हो गई तो ठीक है, नहीं तो अफसर नियम-कानून बताते हुए टिप्पणी लगाकर फाइलें लौटा देते हैं। यहां तक कि संशोधित शासनादेश का भी ख्याल नहीं रखते।
सोमवार जिला पंचायत सभागार में आयोजित उत्तराखंड तकनीकी कर्मचारी संघ उद्यान विभाग के अधिवेशन में विभागीय मंत्री पूरे जोश में नजर आए। करीब डेढ़ घंटे के अपने भाषण में उन्होंने किसी को नहीं छोड़ा। सिस्टम से लेकर अधिकारियों तक पर जमकर प्रहार किए। कहा कि सिस्टम सही नहीं है।
सेटिंग नहीं होने पर अधिकारी वर्षों पूर्व के शासनादेशों का हवाला देते हुए फाइलें लौटा देते हैं। वे ‘हमें’ मूर्ख समझते हैं। मंत्री ने सिस्टम को नकारा तक कह डाला। कहा कि समुद्र मंथन में जिस तरह से अमृत और जहर दोनों निकला, ठीक उसी तरह इस सिस्टम से हमें अमृत निकालना होगा। कहा कि विभागीय पुनर्गठन का एक महीने में शासनादेश कराएंगे।
मंत्री ने कहा कि उनकी सोच हमेशा सकारात्मक रही है, लेकिन कुछ अधिकारी नकारात्मक सोचते हैं। वे अपने काम के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाते हैं, लेकिन जब दूसरे के काम की बारी आती है तो फाइलें दबाकर बैठ जाते हैं। सैनिक कल्याण की एक फाइल का जिक्र करते हुए मंत्री ने कहा कि इस फाइल में मैंने ऐसी टिप्पणी लिख दी हैं कि अधिकारी भनभना गए हैं।
मंच से लगाई कड़ी फटकार
उद्यान निदेशालय रानीखेत में आदेश के बावजूद जनरेटर की व्यवस्था नहीं होने पर नाराज उद्यान मंत्री ने मंच पर बैठे उद्यान निदेशक आईए खान से कहा कि एक जनरेटर लगाने के आदेश दिए थे, इसके बाद भी नहीं लगा। अब उसे लगाने का दोबारा आदेश दे रहा हूं। निदेशक यह समझ लें कि कोई उनका कुछ बिगाड़ सकता है तो वह हरक सिंह है। उद्यान विभाग में बगैर प्रशिक्षित मालियों की नियुक्ति पर हरक ने कहा कि वे राजनीतिक व्यक्ति हैं। सबको खुश करना होता है। अगर माली प्रशिक्षित नहीं हैं तो उन्हें प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।