पुराने दोस्त न सिर्फ आपकी पुरानी स्मृतियों को सहेज कर रखते हैं, बल्कि इनके पास आपकी लंबी उम्र की चाबी भी छुपी है। ऐसे दोस्तों से मिलने के दौरान पुरानी यादें ताजा होती हैं, जिससे खुशी का एहसास होता है। सोशल मीडिया के इस युग में वर्चुअल दोस्तों की भरमार बेशक है, लेकिन सुकून और तसल्ली अपने पुराने या ऐसे दोस्तों से मिलकर होती है, जिनके साथ हमने कुछ समय बिताया है।
आज इंटरनेशनल फ्रेंडशिप डे (मित्रता दिवस) है। दुनिया में जब-जब मित्रता की बात आती है, तब-तब सुदामा और भगवान श्रीकृष्ण की मित्रता की मिसाल दी जाती है। जिंदगी में कभी न कभी ऐसा मुश्किल पल आया होगा, जब आपने तन्हा महसूस किया होगा।
अपनों ने नजरें चुराई होंगी और तब कोई आपका हमदर्द बना होगा। एक बारगी आपको यकीन भी न हुआ कि खून के रिश्ते जब बेरूख हो गए तब अजनबी अपनों से ज्यादा हो गए।
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वरुण बालियान व सतविंद्र सिंह
- फोटो : अमर उजाला
धीरवाली निवासी वरुण बालियान व ज्वालापुर रामनगर निवासी सतविंद्र सिंह की 2008 में एसएमजेएस कालेज में दोस्ती हुई थी। सतविंद्र, वरूण से एक साल सीनियर थे। दोनों ही छात्र राजनीति में सक्रिय रहे। इसके बाद 2012 में वरुण बालियान ने कांग्रेस ज्वाइन कर ली। वहीं सतविंद्र सिंह ने भाजपा। वरुण बालियान बताते हैं कि पार्टी भले ही अलग-अलग हों, लेकिन राजनीति कभी दोस्ती पर भारी नहीं पड़ी। हर सुख-दुख में वरुण और सतविंद्र सिंह एक साथ खड़े हुए नजर आते हैं।
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अंबरीष कुमार व मुरली मनोहर
- फोटो : फाइल फोटो
कांग्रेस के पूर्व विधायक अंबरीष कुमार भाई जी (रौला) और मुरली मनोहर (मौला) की जोड़ी 45 साल बाद बिछड़ गई। आज अंबरीष कुमार की रस्म पगड़ी है। ऐसे में मुरली अपने दोस्त को श्रद्धांजलि देंगे। बताया जाता है गोविंदपुरी विकास कालोनी निवासी मुरली मनोहर व अंबरीष कुमार की दोस्ती 45 साल पहले युवा कांग्रेस के चुनाव के दौरान हुई थी। उसके बाद दोनों की दोस्ती एक मिसाल बन गई। चुनाव के दौरान मुरली मनोहर हर तरीके से अपने साथी रौला का उत्साह बढ़ाते थे। अंबरीष कुमार शोर ज्यादा मचाते थे तो उनको रौला नाम दिया गया था जबकि मुरली मनोहर अधिकतर शांत रहते हैं, इसलिए उन्हे मौला नाम दिया गया था।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
जिदंगी के हर खट्ठे-मीठे पलों के बीच दोस्ती हमेशा सबसे ऊपर रहती है। देश के आजाद होने के बाद हिंदू-मुस्लिम भाईचारे और एकता की मिसाल कायम कर रहे हैं रहीस व मौसम। 20 सालों से इनकी दोस्ती हर दूसरे लोगों के लिए मिसाल बनी हुई है। ज्वालापुर के मोहल्ला पांवधोई निवासी रहीस ठेकेदारी करते हैं। जबकि मौसम ट्रैक्टर चलाते हैं। जहां ईद के दिन रहीस के घर पर मौसम सेवइयां खाने के लिए जाते हैं तो वहीं दीपावली के दिन रहीस मौसम के घर पर मिठाई खाने के लिए परिवार सहित पहुंचते हैं।
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अवधेश व इंद्रमोहन
- फोटो : अमर उजाला
कनखल के मोहल्ला लाटोवाली निवासी अवधेश (68) व पुराना पोस्ट आफिस निवासी इंद्रमोहन (67) की 1982 से दोस्ती है। उनकी दोस्ती के बारे में बताया जाता है कि आज तक किसी भी बात को लेकर दोनों के बीच अनबन नहीं हुई। अवधेश शर्मा होटल व्यवसायी हैं। जबकि इंद्रमोहन मिश्रा ज्योतिष का काम करते हैं। हर सुख-दुख में दोनों के परिवार एक साथ एक दूसरे की मदद के लिए आगे आते हैं।