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Dehradun News: आधे मरीजों को पता ही नहीं, उन्हें है एलर्जिक अस्थमा
Fri, 30 Oct 2026 08:10 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
Updated Fri, 30 Oct 2026 08:10 PM IST
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- उप जिला अस्पताल में रोज पहुंच रहे 20 मरीज
- ठंड बढ़ने से सांस की परेशानी में इजाफा, जौनसार-बावर के मरीज अधिक
संवाद न्यूज एजेंसी
विकासनगर। सांस लेने में परेशानी, बार-बार खांसी और सीने में जकड़न को सामान्य मौसमी समस्या समझकर नजरअंदाज करने वाले कई लोग एलर्जिक अस्थमा की चपेट में हैं। उप जिला अस्पताल विकासनगर में प्रतिदिन औसतन 20 मरीज इस बीमारी के लक्षण लेकर पहुंच रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें करीब आधे मरीजों को जांच से पहले पता ही नहीं था कि उन्हें एलर्जिक अस्थमा है। बारिश के बाद ठंड बढ़ने से मरीजों की परेशानी भी बढ़ गई है।
छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल उपाध्याय के अनुसार एलर्जिक अस्थमा सांस की नलियों में एलर्जी के कारण होने वाली बीमारी है। इसमें नलियों में सूजन आने से वे सिकुड़ने लगती हैं और सांस लेने में दिक्कत होती है। धूल, धुआं, परागकण, फफूंद, ठंडी हवा और मौसम में बदलाव इसके प्रमुख कारण हैं। अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों में जौनसार-बावर क्षेत्र के लोगों की संख्या अधिक है। बार-बार खांसी आना, सांस फूलना, सीने में जकड़न और सांस छोड़ते समय सीटी जैसी आवाज आना इसके प्रमुख लक्षण हैं। रात और सुबह के समय परेशानी बढ़ सकती है।
स्पाइरोमेट्री (पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट) से फेफड़ों की कार्यक्षमता और सांस की नलियों में रुकावट का पता लगाया जाता है। लंबे समय तक बीमारी का पता न चलने और उपचार न मिलने पर बार-बार अस्थमा अटैक पड़ सकते हैं। सांस की नलियों में लगातार सूजन रहने से फेफड़ों की कार्यक्षमता भी प्रभावित हो सकती है। ऐसे लक्षणों को सामान्य खांसी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
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- ठंड बढ़ने से सांस की परेशानी में इजाफा, जौनसार-बावर के मरीज अधिक
संवाद न्यूज एजेंसी
विकासनगर। सांस लेने में परेशानी, बार-बार खांसी और सीने में जकड़न को सामान्य मौसमी समस्या समझकर नजरअंदाज करने वाले कई लोग एलर्जिक अस्थमा की चपेट में हैं। उप जिला अस्पताल विकासनगर में प्रतिदिन औसतन 20 मरीज इस बीमारी के लक्षण लेकर पहुंच रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें करीब आधे मरीजों को जांच से पहले पता ही नहीं था कि उन्हें एलर्जिक अस्थमा है। बारिश के बाद ठंड बढ़ने से मरीजों की परेशानी भी बढ़ गई है।
छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल उपाध्याय के अनुसार एलर्जिक अस्थमा सांस की नलियों में एलर्जी के कारण होने वाली बीमारी है। इसमें नलियों में सूजन आने से वे सिकुड़ने लगती हैं और सांस लेने में दिक्कत होती है। धूल, धुआं, परागकण, फफूंद, ठंडी हवा और मौसम में बदलाव इसके प्रमुख कारण हैं। अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों में जौनसार-बावर क्षेत्र के लोगों की संख्या अधिक है। बार-बार खांसी आना, सांस फूलना, सीने में जकड़न और सांस छोड़ते समय सीटी जैसी आवाज आना इसके प्रमुख लक्षण हैं। रात और सुबह के समय परेशानी बढ़ सकती है।
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स्पाइरोमेट्री (पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट) से फेफड़ों की कार्यक्षमता और सांस की नलियों में रुकावट का पता लगाया जाता है। लंबे समय तक बीमारी का पता न चलने और उपचार न मिलने पर बार-बार अस्थमा अटैक पड़ सकते हैं। सांस की नलियों में लगातार सूजन रहने से फेफड़ों की कार्यक्षमता भी प्रभावित हो सकती है। ऐसे लक्षणों को सामान्य खांसी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
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