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हरिद्वार: पतंजलि में मनाया गुरु पूर्णिमा महोत्सव, रामदेव ने कहा- भारत करेगा पूरी दुनिया का नेतृत्व
Sat, 24 Jul 2021 06:48 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
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Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Sat, 24 Jul 2021 06:48 PM IST
सार
स्वामी रामदेव ने कहा कि यूएनओ और डब्ल्यूएचओ को भारतीय चिकित्सा पद्धतियों योग एवं आयुर्वेद को स्वीकार करना होगा।
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बाबा रामदेव
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
योग गुरु स्वामी रामदेव ने कहा कि पतंजलि योगपीठ के माध्यम से ऋषि-मुनियों की प्राचीन परंपरा स्थापित कर विश्व की सबसे बड़ी आध्यात्मिक शक्ति भारत का निर्माण हो रहा है। वह दिन दूर नहीं जब भारत विश्व का नेतृत्व करेगा।
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स्वामी रामदेव ने यह बात पतंजलि योगपीठ के योग भवन सभागार में गुरु पूर्णिमा महोत्सव के दौरान कही। उन्होंने कहा कि पतंजलि के माध्यम से शिक्षा, संस्कार, चिकित्सा, कृषि, अनुसंधान आदि विविध क्षेत्रों में नए आयाम स्थापित किए जा रहे हैं। दिव्य चरित्र गढ़ने का अद्वितीय कार्य किया जा रहा है।
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उन्होंने कहा कि पतंजलि गुरुकुलम और पतंजलि संन्यास आश्रम में देश के लिए निस्वार्थ भाव से समर्पित संन्यासी तैयार किए जा रहे हैं। पतंजलि गुरुकुलम और पतंजलि विवि को 10 हजार विद्यार्थियों से प्रारंभ होकर एक लाख विद्यार्थियों तक पहुंचाने का लक्ष्य 10 वर्षों में पूर्ण करना है।
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आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि आज हम जो कुछ भी हैं हमारे ऋषि-मुनियों एवं गुरुजनों की कृपा से हैं। उन्होंने कहा कि स्वामी विरजानंद एवं महर्षि दयानंद से चली आई गुरु-शिष्य परंपरा को हमें आगे बढ़ाना है। इस दौरान प्रो. महावीर, साध्वी देवप्रिया, स्वामी परमार्थ देव, डॉ. एनपी सिंह, एनसी शर्मा, ऋतंभरा, ललित मोहन, अंशुल, पारुल, डॉ. जयदीप आर्य, राकेश, एसके तिजारावाला, एलआर सैनी, तरुण राजपूत, विनोद, स्वामी तीर्थदेव, साधना समेत कई लोग मौजूद रहे।
स्वीकाराना होगा योग एवं आयुर्वेद
स्वामी रामदेव ने कहा कि यूएनओ और डब्ल्यूएचओ को भारतीय चिकित्सा पद्धतियों योग एवं आयुर्वेद को स्वीकार करना होगा। हमारी ऋषि संस्कृति को अपनाना होगा। नहीं तो यूएनओ और डब्ल्यूएचओ बदल जाएंगे या इनके हेड-ऑफिस भारत में स्थापित होंगे। पूंजीवाद व सांप्रदायिकता का अंत होगा और सात्विकता, अहिंसा और आध्यात्मिकता का राज पूरी दुनिया में होगा।
तेजी से बढ़ रहा वैचारिक आतंकवाद
स्वामी रामदेव ने कहा कि सोशल मीडिया के दुरुपयोग से वैचारिक आतंकवाद तेजी से बढ़ रहा है। यू-ट्यूबर्स, इंस्ट्राग्राम, ट्वीटर और फेसबुक यूजर्स वैचारिक आतंकवाद के नए चेहरे हैं। नए-नए अकाउंट्स बनाकर हमारे ऋषि-मुनियों, भारत की आध्यात्मिक विभूतियों, महापुरुषों को गाली दी जा रही है। पतंजलि सांस्कृतिक विरासत का संवाहक बनकर इन उन्मादियों के सामने दीवार बनकर खड़ा है। उन्होंनेे कहा कि भौतिक, मजहबी, राजनीतिक आतंकवाद फैलाने वालों को रामदेव और आचार्य बालकृष्ण कभी रास नहीं आएंगे।