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भाई की रिहाई के लिए भटक रहा गुरप्रीत, इंडोनेशिया में मिला मृत्युदंड
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 31 Jul 2016 09:47 AM IST
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gurdeep and gurpreet
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ड्रग तस्करी के आरोप में 12 साल से इंडोनेशिया की जेल में बंद गुरदीप की वतन वापसी के लिए उसका भाई गुरप्रीत जगह-जगह भटक रहा है।
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यहां तक कि आर्थिक तंगी के बावजूद किसी तरह पैसा जुटाकर वह कानूनी मदद लेने और गुरमीत से मिलने इंडोनेशिया भी हो आया है। अब वह विदेश मंत्री समेत विभिन्न राजनेताओं और भारतीय दूतावास समेत आम देशवासियों से गुरमीत की रिहाई के लिए मार्मिक अपील कर रहा है।
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गंगोह (सहारनपुर, यूपी) के शीतलपुर गांव निवासी गुरदीप का भाई गुरप्रीत दून के रेसकोर्स में एक निजी कंपनी में नौकरी करता है। गुरप्रीत ने बताया कि उनका भाई गुरदीप एक दलाल के झांसे में आकर रोजगार के लिए वर्र्ष 2002 में पत्नी और बेटी के साथ न्यूजीलैंड के लिए निकला था, लेकिन दलाल ने उसे धोखे से इंडोनेशिया में रुकवा दिया और नौकरी भी नहीं दी। पैसा खर्च होने लगा तो गुरदीप ने पत्नी और बेटी को भारत भेज दिया। इसी बीच वर्ष 2004 में एक पाकिस्तानी युवक ने धोखा देकर उसे ड्रग तस्करी में फंसाकर जेल भिजवा दिया।
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पता लगने पर गुरप्रीत इंडोनेशिया की जेल में भाई से मिलकर आया और वकील की व्यवस्था भी कराई, लेकिन उसे कोई राहत नहीं मिली। 26 जुलाई 2016 को भारतीय दूतावास से आई सूचना ने उसकी चिंता बढ़ा दी। उसे बताया गया कि बृहस्पतिवार की रात इंडोनेशिया में गुरदीप को गोली मारकर मृत्यु दंड दिया जाएगा।
चार आरोपियों को सरेआम गोली मारकर मृत्युदंड दिया भी गया। लेकिन ऐन वक्त पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के हस्तक्षेप के कारण फिलहाल गुरमीत सिंह की मृत्यु दंड की सजा को कुछ समय के लिए फिलहाल टाल दिया गया है। गुरप्रीत का कहना है कि इससे एक बार फिर उसके परिवार की उम्मीद बढ़ी है। वह सभी से अपील करते हैं कि एक भाई और उसके परिवार के दर्द को समझते हुए गुरदीप की रिहाई में उनकी मदद करें।