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गुलमर्ग क्यों नहीं बन सकता औली?
अंशुल डांगी/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 05 Mar 2014 03:29 PM IST
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देश-दुनिया में पहचान नहीं
कुदरत के जमकर नेमतें बरसाने के बावजूद उत्तराखंड का औली अब तक देश-दुनिया में पहचान नहीं बना सका है।
रस्मी तौर पर हर साल स्कीइंग इवेंट जरूर यहां आयोजित कर लिए जाते हैं, लेकिन बाकी समय यहां सैलानियों की आमद बहुत कम होती है।
दूसरी ओर, समान भौगोलिक परिस्थितियों वाले जम्मू कश्मीर के गुलमर्ग में हर साल इतने पर्यटक पहुंचते हैं कि वहां के स्थानीय लोग टूरिस्ट सीजन में ही सालभर की रोजी का जुगाड़ कर लेते हैं।
आधी आबादी का रोजगार ही स्कीइंग और गाइडिंग
जम्मू कश्मीर के गुलमर्ग में छह महीने के सीजन में लाखों सैलानी पहुंचते हैं। लद्दाख निवासी मंजूर हुसैन खान बताते हैं कि जम्मू-कश्मीर पर्यटन विभाग गुलमर्ग में अवस्थापना विकास और सैलानियों की सुविधाओं के प्रति गंभीर है।
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स्कीइंग के लिए आने वाले सैलानियों से मिलने वाला शुल्क ही इतना हो जाता है कि इस रकम से विभाग यहां तैनात अपने कर्मचारियों की तनख्वाह और अन्य खर्चे निकाल लेता है।
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मंजूर ने बताया कि गुलमर्ग से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित टंगमर्ग तहसील की लगभग आधी आबादी का रोजगार ही स्कीइंग और गाइडिंग है। कुछ लोग स्लेज खींचते हैं तो कुछ घोड़े चलाते हैं।
मजदूर, फोटोग्राफर, टैक्सी, स्कीइंग गाइड आदि काम भी स्थानीय लोग ही करते हैं। पर्यटन विभाग इन लोगों को भी पूरी सुविधा मुहैया कराता है। उनके मुताबिक वहां टूर सीजन के करीब छह माह में ही हर गाइड दो से तीन लाख रुपये कमा लेता है, फिर बाकी छह महीने आराम किया जाता है।
औली में यह हाल, रोपवे के लिए 22 मिनट इंतजार
सर्द मौसम में भारी बर्फबारी के दौरान जोशीमठ से औली तक का मार्ग कई बार बंद हो जाता है। ऐसे में रोपवे औली तक पहुंचने का जरिया बनता है। लेकिन यहां रोपवे में सिर्फ दो गंडोले हैं।
इनमें से एक ऊपर की ओर जाता है तो दूसरा नीचे आता है। सवा चार किलोमीटर लंबे रोपवे पर गंडोले को दूरी तय करने में 22 मिनट लगते हैं। यानी इतनी देर तक अगले यात्री इंतजार करने पर मजबूर होते हैं।
दूसरी ओर, गुलमर्ग के करीब छह किलोमीटर लंबे रोपवे में 100 से अधिक गंडोले हैं। हर तीस सेकंड में एक गंडोला छह सैलानियों को लेकर स्लोप तक जाता है।
रिसेप्शन सेंटर नदारद
औली में पर्यटकों की सुविधा, सहायता के लिए अलग से रिसेप्शन सेंटर तक नहीं बनाया जा सका है। औली स्थित गढ़वाल मंडल विकास निगम के गेस्ट हाउस में ही लोग पूछताछ करते हैं, लेकिन यहां भी यह सुविधा सिर्फ 12 घंटे मिलती है।
जबकि गुलमर्ग में 24 घंटे संचालित होने वाला टूरिस्ट रिसेप्शन सेंटर है। मंजूर हसन के मुताबिक सैलानियों की मदद के अलावा यह सेंटर आपात स्थिति में भी जानकारियां मुहैया कराने का काम करता है।
स्थानीय लोगों का नहीं ख्याल
मंजूर बताते हैं कि गुलमर्ग में सैलानियों के लिए स्थानीय लोगों को स्की शॉप खोलने की अनुमति दी गई है। कश्मीर पर्यटन विभाग स्थानीय लोगों, बच्चों, कारोबारियों से स्की, लिफ्ट और रोपवे का किराया नहीं लेता।
स्कीइंग करने वाले बच्चों को प्रशिक्षण और रहने की सुविधा निशुल्क दी जाती है। यहां औली में कोई निजी स्की शॉप नहीं है। जीएमवीएन ही सैलानियों को स्की देती है। हालांकि, स्थानीय बच्चों को यहां भी निशुल्क स्की दी जाती हैं।
गाइड लाइसेंस की नहीं सुविधा
औली में गाइडों को लाइसेंस जारी करने की कोई व्यवस्था नहीं है। गुलमर्ग में पर्यटन विभाग खुद गाइड तैयार करता है। उन्हें माउंटेन स्कीइंग, कंट्री स्कीइंग, रेस्क्यू का प्रशिक्षण दिया जाता है।
पहाड़ों की जानकारी के लिए तीन-चार दिन का कैंप लगाया जाता है। साथ ही कंपास सहित अन्य उपकरणों की जानकारी दी जाती है। लाइसेंस धारक गाइडों को पर्यटन विभाग, विंटर गेम्स फेडरेशन, और युवा कल्याण विभाग से सैलरी भी मिलती है।
मैं हाल ही में गुलमर्ग से लौटा हूं। वहां भारी हिमपात और बेहद सर्द मौसम के बावजूद अभी पर्यटकों की खासी तादाद मौजूद है। श्रीनगर से गुलमर्ग पहुंचने में दो-तीन घंटे लगते हैं। हमारे सिखाए कई स्कीयर मुझे वहां मिले। औली में सबसे बड़ी दिक्कत पहुंचने की अच्छी सुविधा न होना है। रास्ता बहुत लंबा, कई जगह खराब और थका देने वाला है। इसके अलावा औली में अभी इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास की और जरूरत है, तभी सैलानी यहां आएंगे।
- प्रदीप मंद्रवाल, स्कीइंग इंस्ट्रक्टर, जीएमवीएन