समूह ‘ग’ पदों की सीधी भर्ती मानकों में हुआ बदलाव, अब ऐसे होगा शारीरिक परीक्षा का टेस्ट
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उत्तराखंड में समूह ‘ग’ पदों की सीधी भर्ती में शारीरिक परीक्षा के लिए अब एक ही मानक होंगे। इसके लिए अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने पहली बार विशेषज्ञों से सुझाव लेकर शारीरिक टेस्ट के लिए चार श्रेणी तैयार की है।
प्रदेश सरकार से सैद्धांतिक सहमति लेने के बाद आयोग सर्वे से मानकों के लिए समय और दूरी निर्धारित करेगा। आयोग की इस पहल से शारीरिक परीक्षा कराने में आसानी होगी। वहीं, अभ्यर्थियों को चार मानक के अनुसार ग्राउंड टेस्ट की तैयारी कर सकेंगे।
चयन आयोग ने जिन पदों की सीधी भर्ती में अभ्यर्थियों का फिजिकल टेस्ट होना है। उसके लिए नए मानक बनाने की शुरूआत की है। आयोग की ओर से शारीरिक परीक्षाओं के लिए एक ही मानक बनाए जा रहे हैं।
अभी तक अलग-अलग मानक निर्धारित थे
अभी तक हर विभाग ने शारीरिक परीक्षा के लिए अलग-अलग मानक निर्धारित किए हैं। जिसमें समय ज्यादा लगने के साथ ही अभ्यर्थी भी ग्राउंड टेस्ट क्वालीफाई करने के लिए तैयार नहीं कर पाते हैं।
आयोग ने उत्तराखंड समेत अन्य देश के कई खेल विश्वविद्यालय और अकादमी के विशेषज्ञों के सुझाव पर शारीरिक टेस्ट की श्रेणी बना दी है। सरकार से सहमति लेकर आयोग सर्वे के जरिये प्रत्येक आयु वर्ग के हिसाब से मानकों के लिए समय और दूरी का निर्धारण करेगा।
इन संस्थानों के विशेषज्ञों से ली राय
नेता जी सुभाष नेशनल इंस्टीट्यूट आफ स्पोर्ट्स पटियाला, मरुथल स्पोर्ट्स विश्वविद्यालय हरियाणा, मुजफ्फरनगर स्पोर्ट्स संस्थान, गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, जसपाल राणा शूटिंग संस्थान, खेल विभाग के उप निदेशक से राय लेकर मानक बनाए गए। ये मानक देश भर में होने वाली शारीरिक परीक्षा में लागू होते हैं।
इन चार मानकों पर होगा शारीरिक टेस्ट
विशेषज्ञों के सुझाव से शारीरिक टेस्ट के लिए चार श्रेणी प्रस्तावित की गई। जिन पदों में फिजिकल टेस्ट होना है, उनमें एक ही मानक होंगे। इसमें स्टेमिना के लिए 2.4 किलोमीटर की दौड़, स्पीड के लिए 100 मीटर दौड़, अपर बॉडी के लिए खड़े होकर मेडिसिन बाल थ्रो, लोअर बॉडी के लिए स्टेट ब्रॉड जंप तय किया गया है। इन मानकों के लिए समय और दूरी कितनी होगी। इसके लिए आयोग प्रत्येक आयु वर्ग के अनुसार सर्वे का स्टैंडर्ड टाइम व दूरी निर्धारित करेगा।
शारीरिक परीक्षा के लिए अभी तक अलग-अलग मानक हैं। आयोग का प्रयास है कि शारीरिक टेस्ट के लिए एक ही मानक बनाए जाएं। इसके लिए विशेषज्ञों के सुझाव पर चार श्रेणी तैयार की गई है। सरकार ने अनुमति लेने के बाद प्रदेश भर में सर्वे कराया कर स्टैंडर्ड मानक का निर्धारण किया जाएगा।
-संतोष बडोनी, सचिव, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग