दिल्ली एम्स में भर्ती साध्वी पद्मावती की हालत गंभीर, आईसीयू में भर्ती
- गंगा रक्षा के लिए एक्ट बनाने की मांग लेकर 65 दिन से कर रही थीं अनशन
- 6 घंटे सामान्यतया सड़क मार्ग से लगते हैं हरिद्वार से दिल्ली तक
- 54 किमी का मेरठ सीमा का सफर 28 मिनट में कराया गया पूरा
- मातृसदन का दावा- ब्रेन में नहीं आया इंफेक्शन, अभी भी चेतना नहीं लौटी
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गंगा रक्षा के लिए अनशन करते समय तबीयत बिगड़ने पर दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती मातृ सदन की साध्वी पद्मावती की हालत अभी स्थिर बनी हुई है। हालांकि देर शाम हुए एमआरआई और सिटी स्कैन में ब्रेन में कोई संक्रमण नहीं पाया गया है, लेकिन इसके बावजूद वे होश में नहीं आई है। उन्हें आईसीयू में ही रखा गया है।
15 दिसंबर से अनशन कर रही साध्वी पद्मावती की तबीयत सोमवार को काफी बिगड़ गई थी। उन्हें कनखल स्थित रामकृष्ण मिशन अस्पताल में भर्ती कराने के बाद दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अभी तक भी साध्वी की तबियत में कोई सुधार नहीं पाया गया है।
मातृ सदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने दिल्ली से मिली रिपोर्ट के बाद बताया कि दिनभर हुई जांच के बाद शाम को भी साध्वी का एमआरआई और सिटी स्कैन टेस्ट कराया गया। पहले बताया जा रहा था कि उनके ब्रेन में संक्रमण है लेकिन जांच के बाद इसकी पुष्टि नहीं हुई। इस बीच जल पुरुष राजेंद्र सिंह और अन्य गंगा प्रेमी दिल्ली पहुंचने लगे हैं। वहीं दूसरी ओर मातृ सदन में ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद का आमरण अनशन 19वें दिन भी जारी रहा।
प्रशासन जवाब दे ढाई घंटे एंबुलेंस क्यों रोकी: शिवानंद
स्वामी शिवानंद सरस्वती ने साध्वी पदमावती के स्वास्थ्य में आई गिरावट के लिए सरकार और स्थानीय प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि गंभीर हालत होने के बावजूद बहादराबाद में एंबुलेंस को ढाई घंटे तक जबरन रोकना और साध्वी को घसीटकर एंबुलेंस से निकालने की वजह से उनकी तबियत ज्यादा बिगड़ी।
मंगलवार को मातृ सदन में पत्रकारों से वार्ता करते हुए स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि पहले दिन से ही प्रशासन षड्यंत्र रच रहा है। साध्वी को जबरन दून अस्पताल ले जाकर कुछ ऐसा पदार्थ दिया गया, जिससे उनकी तबियत बिगड़ी और जब दिल्ली ले जा रहे थे तब भी षड्यंत्र करने एंबुलेंस को रोका गया। प्रशासन को जवाब देना चाहिए कि ऐसा क्यों किया गया।
सवा दो घंटे नहीं चार घंटे में पहुंचे : शिवानंद
उन्होंने आरोप लगाया कि एंबुलेंस रोके जाने के बाद उन्हें बताया गया था कि साध्वी को एयर लिफ्ट कराने के लिए ऋषिकेश ले जा रहे हैं। वहां से दिल्ली ले जाएंगे और बाद में दावा किया गया कि ग्रीन कॉरिडोर जैसी व्यवस्था की गई है जो पूरी तरह फर्जी है। ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की गई। सवा दो घंटे में दिल्ली ले जाने की बात कही गई है जबकि साढ़े चार घंटे लगे।
इतने में सामान्य वाहन भी पहुंच जाता है। साथ ही उन्होंने सरकार से जवाब मांगा कि एक और साध्वी अपने प्राण गंगा के लिए त्यागने को आतुर है लेकिन सरकार उनकी मांगों पर कोई चर्चा नहीं कर रही है। जब एनएमसीजी ने भी गंगा में खनन रोकने की बात लिखकर दे दी है तो उसे मानी क्यों नहीं जा रही है। साध्वी के पिता की ओर से लगाए गए आरोपों के बारे में भी कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।
छह घंटे का सफर 2:20 घंटे में पूरा किया
ग्रीन कॉरिडोर के लिए हाईवे पर समस्त थानों को अलर्ट कर दिया गया था। शाम 4:30 बजे लखनऊ से कंट्रोल रूम से मेरठ को सूचना दी गई। तत्काल मेरठ में एसपी ट्रैफिक संजीव बाजपेई को नोडल अफसर बनाया गया। एसपी ट्रैफिक ने बताया कि करीब 5:15 बजे एंबुलेंस ने मेरठ सीमा में प्रवेश किया और 5:43 बजे गाजियाबाद सीमा में पहुंच गई। इस दौरान एनएच 58 का सारा ट्रैफिक रोका गया।
एंबुलेंस के ड्राइवर को कहीं भी ब्रेक नहीं लगाने पड़े। एंबुलेंस के साथ हरिद्वार पुलिस की एक चल रही थी। ट्रैफिक को करीब 20 मिनट पहले ही रोक लिया गया। संबंधित जिलों की सीमा पर वहां की पुलिस एंबुलेंस करीब एक किमी आगे-आगे चल रही थी। दिल्ली-देहरादून हाईवे पर पहली बार ग्रीन कॉरिडोर लागू होते देखकर लोग हैरान थे। शुरुआत में लोगों ने समझा कि वीआईपी आ रहे होंगे, लेकिन अबकी बार तो व्यवस्था अलग थी। एंबुलेंस तेज स्पीड से आई और बिना किसी रुकावट से गुजर गई।
130 की स्पीड से दौड़ रही थी एंबुलेंस
हरिद्वार कंट्रोल रूम के मुताबिक हरिद्वार से दिल्ली का सफर ग्रीन कॉरिडोर में एंबुलेंस ने करीब 2 घंटे 20 मिनट में पूरा किया। अमूमन एंबुलेंस को लगभग पांच घंटे और आम पब्लिक को छह घंटे हरिद्वार से दिल्ली जाने में लग जाते हैं। ग्रीन कॉरिडोर तैयार कराकर साध्वी पद्मावती को समय से अस्पताल तक पहुंचाया गया और उपचार दिलाया।
बताया गया कि हरिद्वार से करीब 130 की स्पीड से एंबुलेंस ग्रीन कॉरिडोर में दौड़ रही थी। आगे आगे सारी व्यवस्था बनाई जा रही थी। दिल्ली में कई बार ग्रीन कॉरिडोर बनाकर मरीजों को समय रहते अस्पताल पहुंचाया गया। हैदराबाद में भी ग्रीन कॉरिडोर बनाकर एक मासूम बच्ची की जान बचाई गई थी। डॉक्टरों ने कहा था कि अगर इलाज में पांच मिनट देरी हो जाती तो बच्ची की मौत हो सकती थी।
पहली बार बनी मेरठ में यह व्यवस्था
एसपी ट्रैफिक संजीव बाजपेई का कहना है कि मेरठ में पहली बार ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। ग्रीन कॉरिडोर बनाने की सूचना मिलने के बाद व्यवस्था बनाने के लिए सिर्फ 45 मिनट थे। सफलतापूर्वक ग्रीन कॉरिडोर तैयार कर दिया गया।