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उत्तराखंड: नई आपत्तियों के साथ फिर लौटी लोकायुक्त की फाइल

Fri, 21 Oct 2016 02:47 AM IST
संजय त्रिपाठी/अमर उजाला, देहरादून
संजय त्रिपाठी/अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 21 Oct 2016 02:47 AM IST
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governor send back again lokayukt file.
गवर्नर केके पॉल - फोटो : amar ujala

लोकायुक्त की फाइल एक बार फिर से तमाम सवाल और आपत्तियों के साथ शासन में लौट आई है। इसमें खासतौर पर लोकायुक्त के लिए गए भेजे गए नाम के पुराने इतिहास के संबंध में सवाल उठाए गए हैं। यह भी पूछा गया है कि पीएफ घोटाले में सीबीआई जांच की बात पता चली है, उसमें क्लीन चिट कब, कहां और कैसे दी गई है। इसके अलावा सामाजिक छवि से संबंधित जानकारी भी मांगी गई है।

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राज्य गठन के बाद जस्टिस रजा शाह सबसे पहले लोकायुक्त बने। उनके बाद जस्टिस झिल्डियाल ने बतौर लोकायुक्त राज्य में तैनाती पाई। उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद से यह पद खाली है। दोबारा लोकायुक्त की तैनाती के लिए राज्य में मौजूदा कांग्रेस सरकार ने उत्तराखंड लोकायुक्त अधिनियम-2011 बनाया।
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लोकायुक्त के नाम के चयन की लंबी प्रक्रिया चली। आखिरकार सलेक्शन कमेटी और सर्च कमेटी ने हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज जेसीएस रावत का नाम फाइनल करके राज्यपाल को फाइल भेज दी। मगर बीती एक जुलाई को लोकायुक्त के चयन संबंधी तमाम शिकायतें आने के बाद मामला खटाई में पड़ गया था। आरोप लगाया गया था कि जिस सर्च कमेटी ने लोकायुक्त के लिए जस्टिस रावत का नाम फाइनल किया है, उसमें एक सदस्य हाईकोर्ट के पूर्व जज भंवर सिंह का नाम है।

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राज्यपाल ने लिखा है छह पन्ने का पत्र

governor send back again lokayukt file.
राज्यपाल केके पॉल - फोटो : file photo

उन्होंने आरोप लगाया कि गाजियाबाद में हुए सात करोड़ के पीएफ घोटाले में उन पर भी आंच आई थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर शुरू हुई जांच में जस्टिस जेसीएस रावत से भी सीबीआई ने पूछताछ की थी, जिनका नाम लोकायुक्त के लिए भेजा गया है। इन सबके बीच राज्यपाल ने पारदर्शिता के अभाव की बात कहते हुए फाइल शासन को वापस भेज दी।

इसमें राज्यपाल ने छह पन्ने का एक पत्र भी लिखा, जिसमें शासन की इस तरह की लापरवाही की पूरी कलई खोली गई थी। इधर, करीब दो माह की मशक्कत के बाद सितंबर में दोबारा शासन से फाइल राजभवन को भेजी। मगर मंगलवार को फाइल फिर से शासन में वापस आ गई।

राजभवन ने पूछा है कि लोकायुक्त के लिए जो नाम भेजा गया है, उनके विरुद्ध सीबीआई जांच की बात सामने आई है। ऐसे में यह बताया जाए कि क्या यह जांच समाप्त हो चुकी है और संबंधित व्यक्ति को क्लीन चिट मिली है या नहीं? इसके अलावा यदि क्लीन चिट दी गई है तो कब और किसने दी है? वहीं आम छवि के बारे में भी तमाम सवाल पूछे गए हैं। सूत्रों की मानें तो शासन की ओर से इस बाबत जल्द ही जवाब बनाकर राजभवन को भेजे जाने की तैयारी शुरू हो गई है। मगर चर्चा यह भी है कि विवादों में पड़ने के चलते लोकायुक्त का गठन इस सरकार के कार्यकाल में मुश्किल है।

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