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बिजली किल्लत: गैस प्लांट से जुड़े यूपीसीएल के फैसले पर शासन ने लगाई रोक, पढ़िए पूरा मामला
Sat, 02 Apr 2022 04:47 PM IST
रेनू सकलानी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: रेनू सकलानी
Updated Sat, 02 Apr 2022 04:47 PM IST
सार
बीटा कंपनी ने यूपीसीएल के निर्णय के खिलाफ नियामक आयोग का दरवाजा खटखटाया था। आयोग ने भी नियमों का हवाला देते हुए यूपीसीएल के फैसले को सही ठहराया था। यूपीसीएल के इस फैसले पर शासन ने विधानसभा चुनाव के दौरान रोक लगा दी।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
गैस आधारित पावर प्लांट बीटा कंपनी की 107 मेगावाट क्षमता को अन्य में बांटने के यूपीसीएल के फैसले पर शासन ने रोक लगा दी है। फिलहाल प्रदेश के किसी भी गैस आधारित प्लांट से विद्युत उत्पादन नहीं हो रहा है। प्रदेश में बिजली किल्लत के बीच गैस आधारित पावर प्लांट का मामला एक बार फिर ताजा हो रहा है।
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दरअसल, 2016 में काशीपुर स्थित श्रावंति से 214 मेगावाट, गामा कंपनी से 107 मेगावाट बिजली के लिए यूपीसीएल ने पावर परचेज एग्रीमेंट (पीपीए) किया था। वहीं, 2017 में बीटा कंपनी से भी 107 मेगावाट का पीपीए किया गया। नियमानुसार बीटा कंपनी को 12 माह के भीतर उत्पादन शुरू करना था लेकिन नहीं कर पाई। लिहाजा, 2019 में यूपीसीएल ने इसका पीपीए टर्मिनेट कर दिया। इसके 107 मेगावाट को श्रावंति और गामा कंपनी में बांट दिया गया।
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यूपीसीएल के इस निर्णय के खिलाफ बीटा कंपनी ने नियामक आयोग का दरवाजा खटखटाया। आयोग ने भी नियमों का हवाला देते हुए यूपीसीएल के फैसले को सही ठहराया था। यूपीसीएल के इस फैसले पर शासन ने विधानसभा चुनाव के दौरान रोक लगा दी। अब शासन को इस पर निर्णय लेना है। दूसरी ओर, गैस की कीमतें महंगी होने की वजह से वर्तमान में किसी भी गैस आधारित पावर प्लांट से बिजली का उत्पादन नहीं हो पा रहा है।