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छोटे-छोटे शहरों से गुलजार होगा उत्तराखंड

Thu, 01 Jan 2015 10:14 AM IST
सुधाकर भट्ट/ अमर उजाला, देहरादून
सुधाकर भट्ट/ अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 01 Jan 2015 10:14 AM IST
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government make new cities in uttarakhand.

हल्द्वानी और देहरादून जैसे शहरों पर बढ़ते जनसंख्या के दबाव को देखते हुए सरकार ने अब प्रदेश में (पहाड़ों पर फोकस करते हुए) छोटे शहर बसाने का फैसला किया है। शहरी विकास विभाग ने इसके लिए सर्वे भी शुरू कर दिया है।

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फिलहाल ऐसे स्थानों की खोज है जो आपदा के लिहाज से सुरक्षित हों। जहां लोगों के लिए रोजगार के पर्याप्त अवसर और बाजार उपलब्ध हों।

पलायन प्रदेश की बड़ी समस्या है। गांवों के खाली होने का हल तलाश रही सरकार को अब चुनिंदा शहरों में बढ़ती जनसंख्या के दबाव से भी जूझना पड़ रहा है। खुद मुख्यमंत्री हरीश रावत इस पर चिंता जता रहे हैं।
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इस स्थिति से निपटने के लिए प्रदेश सरकार अब गांवों और शहरों के बीच छोटे और नियोजित शहर बनाने की तैयारी में हैं। इन स्थानों पर शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, बिजली और अन्य सुविधाओं का विकास किया जाएगा। इन क्षेत्रों की आबादी को करीब 60 हजार तक सीमित रखा जाएगा।
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लघु एवं मध्यम उद्योग नीति में भी परिवर्तन
बताया गया कि नई लघु एवं मध्यम उद्योग नीति में भी ऐसे प्रावधान किए जा रहे हैं कि उद्यमियों को विकसित किए जाने वाले इन छोटे-छोटे शहरों की ओर आकर्षित किया जा सके।

हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार इन शहरों को बसाने के लिए धन कहां से जुटाएगी और कितने शहर बसाए जाएंगे। शहरी विकास विभाग के मुताबिक सर्वे पूरा होने के बाद ही आगे की कसरत होगी।

स्मार्ट शहर के लिए हमारे पास बजट नहीं है। यह बड़ा काम है। पर हम छोटे-छोटे ‘प्लान्ड हैबीटेट’ (नियोजित बसाव) तो विकसित कर ही सकते हैं। इसके लिए हमने लघु एवं मध्यम उद्योग नीति में भी परिवर्तन किया है।
- हरीश रावत, मुख्यमंत्री

सर्वे शुरू कर दिया गया है। प्राथमिक स्तर पर उन स्थानों को चिह्नित किया जा रहा है जो सुरक्षित हों और जहां विस्तार की गुंजाइश हो।
- डीएस गर्ब्याल, शहरी विकास सचिव

32 फीसदी की दर से बढ़ी दून की जनसंख्या
प्रदेश के मैदानी शहरों पर जनसंख्या दबाव किस कदर बढ़ रहा है इसका अंदाजा 2001 की जनगणना से तुलना करने पर हो जाता है। दून जिले में ही जनसंख्या करीब 32 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ रही है।

2001 में दून जिले की जनसंख्या करीब 12 लाख थी जो इस समय 16 लाख है। 2001 में दून में जनसंख्या घनत्व 412 प्रति वर्ग किलोमीटर था जो इस समय बढ़कर 549 प्रति वर्ग किलोमीटर पहुंच गया है।


यही हाल हल्द्वानी-काठगोदाम का है। 2001 में इस क्षेत्र की जनसंख्या करीब 1.29 लाख थी जो अब बढ़कर 1.56 लाख हो गई है। परेशानी यह भी है कि इन शहरों के चारो तरफ विस्तार हो रहा है। इस पेरी अर्बन क्षेत्र के लोग भी शहर पर ही निर्भर है। 1900 में हल्द्वानी की जनसंख्या मात्र 6000 थी।

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