अच्छी खबर: लोकसभा चुनाव से पहले सरकारी कर्मचारियों को मिलेगी भत्ते और एरियर की सौगात
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लोस चुनाव से पहले त्रिवेंद्र सरकार लोक लुभावन मुद्रा में नजर आएगी। बड़ा वोट बैंक माने जाने वाले कर्मचारियों को रिझाने के लिए सरकार ने शुरुआत कर दी है। लंबे समय से चली आ रही है वेतन विसंगति को दूर करके सरकार ने एक लाख से अधिक कर्मचारियों को लाभ दिया है। कर्मचारी सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत पचास फीसदी एरियर और भत्तों की राह देख रहे हैं।
कर्मचारियों की इन दोनों मांगों पर सरकार पहले ही हामी भर चुकी है। भत्तों पर कैबिनेट की मुहर बाकी है जबकि एरियर का मामला पैसों के इंतजाम से जुड़ा है। कर्मचारियों की वेतन विसंगति दूर करने से पहले सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक से 200 करोड़ रुपये का ऋण मांग लिया है। ये धनराशि मंगलवार को सरकार के खाते में आ जाएगी।
जनवरी माह में भी सरकार की और ऋण उठाने की तैयारी है। एरियर और भत्तों के लिए उसे कम से कम 600 करोड़ रुपये की आवश्यकता है। वित्त विभाग इस धनराशि के इंतजाम में जुटा है। इसके अलावा सरकार को नव गठित निकायों को भी विकास के लिए धनराशि जारी करनी है। सोमवार तक सरकार ये धनराशि जारी कर सकती है। सूत्रों के मुताबिक समाज कल्याण विभाग को भी बकाया पेंशन व छात्रवृत्ति जारी करने को कहा गया है।
कर्मचारी भी दबाव बनाने की तैयारी में
लोस चुनाव के चलते कर्मचारी संगठनों ने भी अपनी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी समन्वय मंच ने लंबित मांगों पर सरकार के उदासीन रुख से नाराज होकर दो जनवरी को धरना और प्रदर्शन का फैसला किया है। मंच के बैनर तले कर्मचारी आकास्मिक अवकाश लेकर धरना-प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद मंच का आंदोलन चरणबद्ध ढंग से आगे बढ़ेगा।
उधर, उत्तराखंड कर्मचारी, शिक्षक आउटसोर्स संयुक्त मोर्चा ने भी पांच जनवरी को कार्यकारिणी की बैठक बुला ली है। इस बैठक में मोर्चा आंदोलन की रणनीति पर विचार करेगा। इससे पूर्व मोर्चा का संयोजक मंडल मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह और अपर मुख्य सचिव (कार्मिक ) राधा रतूड़ी से मुलाकात करेगा और उनसे मांगों पर कार्रवाई करने की मांग करेगा।
मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री और अपर मुख्य सचिव कार्मिक से मांगों के संबंध में वार्ताएं हुईं, समझौते भी हैं। वित्त मंत्री के पत्र पर मंच ने अपना आंदोलन स्थगित भी किया। लेकिन एक भी मांग पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। कर्मचारी आंदोलन नहीं चाहते, लेकिन सरकार की उदासीनता उन्हें ऐसा करने को मजबूर कर रही है।
- नवीन कांडपाल, मुख्य संयोजक, अधिकारी कर्मचारी समन्वय मंच
वेतन विसंगति की मांग को पूरा करने पर हम मुख्यमंत्री का धन्यवाद करते हैं। मोर्चा बिल्कुल आंदोलन के पक्ष में नहीं है। लेकिन बाकी मांगों पर सरकार का रुख स्पष्ट नहीं है। हम एक बार फिर सरकार के समक्ष अपनी बात रखेंगे। यदि कोई सुनवाई नहीं हुई तो पांच जनवरी को कार्यकारिणी की बैठक में आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी।
- ठाकुर प्रहलाद सिंह, मुख्य संयोजक, उत्तराखंड कर्मचारी शिक्षक, आउटसोर्स संयुक्त मोर्चा