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कागज की भी नब्ज टटोलिए साहब!
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 18 Jan 2015 05:05 PM IST
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बिना देखे-समझे घपले की कागजों पर कलम चलाने वाले साहब आजकल बड़े परेशान हैं। वैसे ये साहब नब्ज टटोलकर मर्ज दूर करते हैं। पर साहब कागज की नब्ज समझने में गच्चा खा गए।
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मुकदमे की बात भी
अब विभाग में हुए करोड़ों रुपए के घपले में फंसते नजर आ रहे हैं। साहब कहते फिर रहे हैं कि भैय्या कागजों पर सिफारिश मंत्री जी की थी तो मैं भला कैसे इनकार कर देता। मंत्री जी के आदेश की भाषा भी ऐसी थी कि समझ नहीं पाए कि इसमें फंसना पड़ सकता है।
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अब मंत्री का तो कुछ नहीं बिगड़ने वाला उल्टा इसके लिए भी हमें ही जिम्मेदार बताया जा रहा है। जांच तो बैठा दी अब मुकदमे की बात भी हो रही है। ये साहब कह रहे हैं कि मैंने न तो ‘तेल’ देखा और न तेल की धार ही देखी।
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अब ये ‘तेल’ और तेल की धार ही फंसाती नजर आ रही है। अरे भाई, आप लोगों की बिरादरी के बारे में तो वैसे ही कहा भी जाता है कि आप गड़े मुर्दे देखकर भी बता दें कि आदमी मरा किस मर्ज से होगा? फिर कागज पर आपकी कलम कैसे फिसल गई।
आपके और आपकी बिरादरी के लोगों के लिए सलाह है आगे से ध्यान रखें कागज की भी नब्ज जरूर टटोल लें साहब!