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खुले में सामान, खुले आसमान के नीचे बन रहा खाना
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लोहारी स्कूल परिसर में ग्रामीणों के माध्यम से खाना बनाने के लिए की गई व्यवस्था।
- फोटो : VIKAS NAGAR
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लोहारी गांव के पानी में डूबने से जहां ग्रामीणों को अपने घर व गांव से बेदखल हो जाने का गम है, वहीं उनके सामने फिलहाल के कठिन समय का मुकाबला करना भी आसान नहीं है। गांव के सरकारी स्कूल में रह रहे परिवारों का सारा घरेलू सामान स्कूल के मैदान में पड़ा हुआ है वहीं, खाना बनाने तक के लिए उनके सामने पत्थर व ईंट से बनाए चूल्हों पर खुले आसमान के नीचे भोजन आदि बनाने की मजबूरी है।
लोहारी गांव के डूब जाने से यहां रहने वाले लगभग एक सौ परिवारों में से 35 ऐसे परिवार हैं जो कि अभी गांव में स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय में रूके हुए हैं। स्कूल के चार कमरों व स्कूल से सटे एक निजी आवासीय भवन के चार कमरों में इन 35 परिवारों के सदस्य जैसे-तैसे रात गुजार रहे हैं। सभी परिवारों का अधिकतर घरेलू सामान स्कूल की बाउंड्री के भीतर खाली पड़ी जगह में बेतरतीब ढंग से भरा हुआ है। विद्यालय परिसर में रह रहे ग्रामीण पत्थर व ईंट से बनाए गए चूल्हों पर खुले आसमान के नीचे ही अपना खाना-नाश्ता तैयार कर रहे हैं। ग्रामीण रेखा देवी, विनीता तोमर, रीता तोमर, आशा चौहान, गजेंद्र सिंह, ओमपाल सिंह, कल्लू, सुखपाल सिंह, भाव सिंह, भरत सिंह, महेश पाल, राजेंद्र सिंह, स्वराज, रणवीर सिंह, स्वरूप, राजपाल तोमर, टीकम सिंह, अनिल ने बताया कि ग्रामीणों का आपसी संबंध बेहद गहरा रहा है। ऐसे में सभी की यह इच्छा है कि शासन-प्रशासन गांव के आसपास ही कोई खाली पड़ी जमीन पर ग्रामीणों को बसाने की कार्रवाई करे। जिससे सभी ग्रामीण पहले की तरह ही एक साथ रह सकें।
शासन प्रशासन से की जा रही मांग
लोहारी गांव के विस्थापितों के आंदोलन व धरने-प्रदर्शन आदि का नेतृत्व करने वाले अधिवक्ता नरेश चौहान का कहना है कि उनकी लड़ाई पहले दिन से यही रही है कि सभी विस्थापितों को एक स्थान पर बसाया जाए। जिसके लिए प्रशासन व शासन को बाड़वाला व इसके आसपास की कई जगहों के लिए प्रस्ताव भी दिया गया लेकिन शासन-प्रशासन उनकी इस मांग को सुनने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में अधिकारियों व प्रदेश सरकार से लगातार बात की जा रही है।
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लोहारी गांव के डूब जाने से यहां रहने वाले लगभग एक सौ परिवारों में से 35 ऐसे परिवार हैं जो कि अभी गांव में स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय में रूके हुए हैं। स्कूल के चार कमरों व स्कूल से सटे एक निजी आवासीय भवन के चार कमरों में इन 35 परिवारों के सदस्य जैसे-तैसे रात गुजार रहे हैं। सभी परिवारों का अधिकतर घरेलू सामान स्कूल की बाउंड्री के भीतर खाली पड़ी जगह में बेतरतीब ढंग से भरा हुआ है। विद्यालय परिसर में रह रहे ग्रामीण पत्थर व ईंट से बनाए गए चूल्हों पर खुले आसमान के नीचे ही अपना खाना-नाश्ता तैयार कर रहे हैं। ग्रामीण रेखा देवी, विनीता तोमर, रीता तोमर, आशा चौहान, गजेंद्र सिंह, ओमपाल सिंह, कल्लू, सुखपाल सिंह, भाव सिंह, भरत सिंह, महेश पाल, राजेंद्र सिंह, स्वराज, रणवीर सिंह, स्वरूप, राजपाल तोमर, टीकम सिंह, अनिल ने बताया कि ग्रामीणों का आपसी संबंध बेहद गहरा रहा है। ऐसे में सभी की यह इच्छा है कि शासन-प्रशासन गांव के आसपास ही कोई खाली पड़ी जमीन पर ग्रामीणों को बसाने की कार्रवाई करे। जिससे सभी ग्रामीण पहले की तरह ही एक साथ रह सकें।
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शासन प्रशासन से की जा रही मांग
लोहारी गांव के विस्थापितों के आंदोलन व धरने-प्रदर्शन आदि का नेतृत्व करने वाले अधिवक्ता नरेश चौहान का कहना है कि उनकी लड़ाई पहले दिन से यही रही है कि सभी विस्थापितों को एक स्थान पर बसाया जाए। जिसके लिए प्रशासन व शासन को बाड़वाला व इसके आसपास की कई जगहों के लिए प्रस्ताव भी दिया गया लेकिन शासन-प्रशासन उनकी इस मांग को सुनने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में अधिकारियों व प्रदेश सरकार से लगातार बात की जा रही है।
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