मौसम परिवर्तन के प्रभावों से सबसे अधिक गरीब प्रभावित होगा : डॉ. हर्षवर्धन
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ग्लोबल वार्मिंग और मौसम परिवर्तन के प्रभावों से सबसे अधिक गरीब वर्ग ही प्रभावित होगा। ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिर्वतन के खतरों को कम करने के लिए सभी को मिलकर काम करने की जरूरत है। ग्लोबल वार्मिंग और मौसम परिवर्तन को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को बहुत जिम्मेदारियां मिलीं हैं।
यह बात केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने सोमवार को जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयन पर्यावरण संस्थान कटारमल के 24वें स्थापना दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही।
बतौर मुख्य अतिथि कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग और मौसम परिवर्तन आज वैज्ञानिकों के लिए चुनौती बना हुआ है। कुछ साल पहले पेरिस में हुए सम्मेलन में भी भारत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दुनिया के सामने जो बातें रखीं, उसे काफी गंभीरता से लिया गया। पर्यावरण मंत्री ने कहा कि आज पर्यावरण और विकास तथा इकोलॉजी और इकोनॉमी के बीच समन्वय बनाकर काम करने की जरूरत है।
उन्होंने मौसम परिवर्तन सहित अन्य पर्यावरणीय विषयों को लेकर जीबी पंत संस्थान को काफी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि संस्थान के स्थापना दिवस पर हर साल यहां से ऐसा संदेश जाना चाहिए जो पूरे देश के लिए नजीर बन सके।
केंद्रीय कपड़ा राज्यमंत्री अजय टम्टा ने संस्थान की ओर से किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा की। उन्होंने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री से क्षेत्र की सड़कों और अन्य विकास योजनाओं को लेकर वन भूमि हस्तांतरण के मामले जल्द निपटाने के लिए अधिकारियों को निर्देशित करने का आग्रह किया। केंद्रीय पर्यावरण सचिव सीके मिश्रा ने वैज्ञानिकों से जल संरक्षण, जल संवर्धन, नदी पुनर्जनन कार्यों पर भी जोर दिया।
संस्थान के निदेशक डॉ.आरएस रावल ने सभी का स्वागत करते हुए संस्थान की उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम में भारत सहित नेपाल, भूटान और सातहिमालयी राज्यों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।
केंद्र सरकार चला रही ग्रीन गुड डीड्स अभियान
इनकी रही कार्यक्रम में मौजूदगी
जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयन पर्यावरण संस्थान कटारमल के 24वें स्थापना दिवस समारोह में द्वाराहाट के विधायक महेश नेगी, गंगोलीहाट की विधायक मीना गंगोला, कपकोट के विधायक बलवंत भौर्याल के अलावा पूर्व केंद्रीय पर्यावरण सचिव हेम पांडे, जिलाधिकारी नितिन भदौरिया, सीडीओ मयूर दीक्षित, गढ़वाल विवि के पूर्व कुलपति प्रो.एसपी सिंह, प्रो. वासु, पद्मश्री ललित पांडे, प्रो. शेखर पाठक, डॉ.जेसी भट्ट, प्रो. ललित तिवारी, प्रो. आरके कोहली, प्रो. रमेश नेगी, डॉ.आरसी सुंदरियाल, डॉ. गोकुल सत्याल, वन संरक्षक आईपी सिंह, डीएफओ पंकज कुमार सहित अन्य लोग उपस्थित थे। अंत में वरिष्ठ वैज्ञानिक इंजीनियर किरीट कुमार ने सभी का आभार जताया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. दीपा बिष्ट ने किया। इस अवसर पर अतिथियों ने संस्थान की ओर से प्रकाशित शोध पुस्तिकाओं का विमोचन भी किया।
केंद्र सरकार चला रही ग्रीन गुड डीड्स अभियान
अल्मोड़ा। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिर्वतन मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने जीबी पंत संस्थान कोसी कटारमल में पत्रकारों से वार्ता में कहा कि मंत्रालय की ओर से ग्रीन गुड डीड्स के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इसमें 700 छोटे-छोटे कार्य हैं, जिसमें देश का कोई भी व्यक्ति अपना योगदान दे सकता है। उन्होंने गुड डीड्स का उदाहरण देते हुए कहा कि आज के इस कार्यक्रम में पानी के लिए प्लास्टिक की बोतलों का उपयोग नहीं किया गया। यह भी एक तरह से ग्रीन गुड डीड्स का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि नेट कनेक्ट कर मोबाइल में डॉ. हर्षवर्धन लिखने पर इन सभी 700 ग्रीन गुड डीड्स की सूची सामने आ जाएगी। ग्रीन बोनस के बारे में पत्रकारों के सवाल को डा. हर्षवर्धन टाल गए।
आंकड़ों को नतीजों की तरफ ले जाएं वैज्ञानिक : प्रो. राय
अल्मोड़ा। 24वां गोविंद बल्लभ पंत स्मारक व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद के सीनियर साइंटिस्ट प्रो. पीएस राय ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र के अध्ययन में आंकड़ों का बड़ा महत्व है। उन्होंने वैज्ञानिकों से आंकड़ों को नतीजों की तरफ ले जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज सेटेलाइट पर आधारित अध्ययन की बहुत जरूरत है। इसके लिए सेटेलाइटों की संख्या भी बढ़ाई जाए।