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सावधान! नैनीताल में दिखने लगा ग्लोबल वॉर्मिंग का असर

Mon, 04 Jan 2016 08:30 AM IST
चंद्रेश पांडे - भूपेश कन्नौजिया/ अमर उजाला, नैनीताल - मुक्तेश्वर
चंद्रेश पांडे - भूपेश कन्नौजिया/ अमर उजाला, नैनीताल - मुक्तेश्वर Updated Mon, 04 Jan 2016 08:30 AM IST
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global warming effect on crops.

सेब उत्पादन के लिए प्रसिद्ध नैनीताल जिले के रामगढ़, बेतालघाट, भीमताल, धारी विकासखंड इस बार बर्फबारी के लिए तरस रहा है। फल पट्टी के रूप में प्रसिद्ध इस क्षेत्र की फसलों पर ग्लोबल वॉर्मिंग का असर देखा जा रहा है।

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पिछले साल दो जनवरी के मुकाबले इस बार अधिकतम तापमान में पांच डिग्री बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ऐसे हालात में सेब के पेड़ कमजोर पड़ रहे हैं। फसलों पर रोगों के हमले की आशंका भी बढ़ गई है। आर्द्रता और चिलिंग घटने के साथ-साथ सेब का रकबा भी घट रहा है। फसलों की सुरक्षा कर ताकत देने वाली बर्फ न गिरने से काश्तकार मायूस हैं।
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फल पट्टी में बर्फबारी पर नजर डालें तो 2010 में पहला हिमपात 31 दिसंबर को महज पांच इंच हुआ था। उसके बाद वर्ष 2011 में 16 फरवरी को भी इतना ही लगभग इतना ही हिमपात हुआ। 2012 में 13 दिसंबर को ही पहली बर्फबारी हो गई थी, जबकि 2013 में 19 जनवरी को बर्फ गिरी।
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2014 में 14 दिसंबर को पर्वतीय क्षेत्रों में काफी बर्फबारी हुई थी। उसके बाद जनवरी 2015 में हल्का हिमपात हुआ। इस बार दिसंबर का महीना बीतने के बावजूद अभी तक बर्फबारी तो दूर बारिश तक नहीं हुई है। किसानों को आशंका है कि जनवरी में भी बर्फबारी नहीं हुई तो उनकी सेब की फसल चौपट हो जाएगी।

इसलिए जरूरी है बर्फबारी

global warming effect on crops.

केंद्रीय शीतोष्ण बागवानी संस्थान के प्रभारी परिसर एवं सीनियर वैज्ञानिक डा. बीएल अत्री का कहना है कि यदि बर्फ नहीं पड़ती है तो सेब व अन्य फलदार वृक्षों सहित सब्जियों में रोग लगने की आशंका है। पौधों का विकास तो रुकेगा ही उनमे कीटों का हमला भी होगा, जिससे पैदावार को नुकसान होगा। सेब में कैंकर रोग के साथ तना छेदक, बूली एफिड रोग लग सकता है।  

क्षेत्र में सेब के घटे रकबे पर नजर
उद्यान विभाग के हालिया सर्वे के मुताबिक जिले की फल पट्टी क्षेत्र में सेब के बगीचों का रकबा 6 हजार 580 हेक्टेयर घट गया है। सेब का उत्पादन भी 30 हजार मीट्रिक टन से घटकर महज 8 हजार मीट्रिक टन ही रह गया है।

जिला उद्यान अधिकारी रामेश्वर सिंह, ज्येष्ठ उद्यान निरीक्षक टीएन पांडे और सहायक विकास अधिकारी गिरधर सिंह खाती का कहना है कि सेब के बगीचों के खत्म होने के पीछे ग्लोबल वार्मिंग के साथ-साथ क्षेत्र में जमीन की खरीद-फरोख्त के बाद बढ़ते कंक्रीट के जंगल जिम्मेदार हैं।

मौसम विज्ञानियों के मुताबिक सेब ठंडे इलाकों में अच्छा फल और गुणवत्ता वाला होता है। जितना अधिक ठंडा मौसम होगा, सेब की क्वालिटी और गुणवत्ता में उतना ही अधिक सुधार होगा। पंतनगर कृषि विवि के मौसम विज्ञानी डा. एचएस कुशवाहा के मुताबिक सेब की अच्छी फसल तभी मिल सकती है, जब तापमान काफी कम हो। अगर समय पर बर्फबारी हो जाए तो सेब का बेहतर उत्पादन होगा।

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