Kedarnath: चोराबाड़ी से तीन किमी ऊपर हिमालय क्षेत्र में टूटा ग्लेशियर, विशेषज्ञ बोले- यह सामान्य घटना
केदारनाथ धाम में चोराबाड़ी ग्लेशियर के कैचमेंट में हिमस्खलन आया है। हालांकि इससे कोई नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन प्रसाशन इस पर नजर बनाए हुए है। चोराबाड़ी ग्लेशियर केदारनाथ मंदिर के पीछे करीब 5 किमी की दूरी पर स्थित है।
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बृहस्पतिवार शाम लगभग साढ़े छह बजे केदारनाथ से पांच किमी ऊपर चोराबाड़ी ग्लेश्यिर से लगभग तीन किमी ऊपर हिमालय क्षेत्र में एक ग्लेशियर टूटा। इस घटना को केदारनाथ में मौजूद कई यात्रियों ने देखा। जीएमवीएन में तैनात कर्मी गोपाल सिंह रौथाण, प्रदीप रावत आदि ने बताया कि उक्त क्षेत्र में काफी देर तक सफेद धुएं का गुबार देखा जो धीरे-धीरे नीचे की तरफ आया और गहरी खाई में समा गया।
वाडिया संस्थान से सेवानिवृत्त हुए ग्लेशियर विशेषज्ञ डा. डीपी डोभाल ने इसे हिमालय क्षेत्र में होने वाली सामान्य घटना बताया। उन्होंने कहा कि जो ग्लेशियर टूटा है, वह काफी छोटा था। इस ग्लेशियर के टूटने से चोराबाड़ी ग्लेशियर के किसी हिस्से को आंशिक नुकसान हो सकता है जबकि अन्य क्षेत्रों में इससे कोई नुकसान नहीं हो सकता। बताया कि हिमालय क्षेत्र में इस तरह के ग्लेशियर को पाउडर ग्लेशियर कहते हैं, जिसमें नई बर्फ ज्यादा होती है और वह टूटते रहते हैं। हैगिंग ग्लेशियर में भी टूटने की प्रक्रिया होती रहती है।
शासन को दे दी गई सूचना
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने बताया कि ग्लेशियर टूटने की घटना के बारे में शासन को सूचित कर दिया गया है। साथ ही वाडिया संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिकों से भी चर्चा की गई है। शासन स्तर से जल्द विशेेषज्ञों की एक टीम चोराबाड़ी क्षेत्र का भ्रमण कर वहां के हालातों का जायजा लेगी। संवाद
क्षेत्र की नियमित निगरानी जरूरी
जून 2013 की केदारनाथ आपदा का कारण बने चोराबाड़ी ताल से आने वाले 25 से 30 वर्षों या उससे भी अधिक समय तक कोई खतरा नहीं है। वाडिया संस्थान के पूर्व वरिष्ठ ग्लेशियर विशेषज्ञ और आपदा के बाद केदारनाथ से लेकर चोराबाड़ी ताल क्षेत्र का गहन अध्ययन करने वाले डा. डीपी डोभाल बताते हैं कि केदारघाटी रामबाड़ा से आगे यू आकार में है, जो बहुत लंबा है।
चोराबाड़ी ताल जब बना, तब उसकी गहराई सिर्फ आठ मीटर और चौड़ाई तीन सौ मीटर थी लेकिन वर्ष 2013 में ग्लेशियर टूटने के बाद इसकी गहराई 25 मीटर तक हो गई है और मुहाना पूरी तरह से टूट गया जिससे मलबा भी बह चुका है। इस क्षेत्र की नियमित निगरानी बहुत जरूरी है। चोराबाड़ी ग्लेशियर सात किमी लंबा है और दूसरा कंपेनियन ग्लेशियर तीन किमी लंबा है।