देवभूमि घूमने आए विदेशी लोगों को भा गई पहाड़ी संस्कृति, यहां रम गया इनका मन
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चमोली जिले की वादियों में घूमने आए जर्मनी के 11 सदस्यीय दल को यहां के रीति-रिवाज, बोली-भाषा और हस्तशिल्प खूब भाया।
सैलानियों ने ग्रामीणों से रिंगाल की टोकरियां भी खरीदीं और स्कूली बच्चों को सामान बांटा। छह दिनों तक पर्यटक स्थलों के सैर-सपाटे के बाद पर्यटक दोबारा आने का वायदा कहकर वापस चले गए।
24 सितंबर को जर्मनी से 11 सैलानियों का दल गोपेश्वर के समीप रौली-ग्वाड़ गांव में स्थित होम स्टे में ठहरने के लिए आया था। यह दल बचन चैरिटेबल ट्रस्ट की अध्यक्ष पूनम रावत और संरक्षक तुलसी रावत के जरिए यहां पहुंचा।
सैर-सपाटे पर यहां पहुंचा विदेशी पर्यटकों का दल
दल के सदस्यों ने पर्यटन स्थल चोपता, मंडल घाटी और कुजौं-मैकोट के सैर-सपाटे पर पहुंचा। ट्रस्ट ने सैलानियों को डुंगरी और कुजौं-मैकोट गांव में हस्पशिल्प कला से रूबरू कराया।
पर्यटकों को हस्तशिल्प कला इतनी भायी कि उन्होंने पंद्रह टोकरियां भी खरीदीं। प्राथमिक विद्यालय कुजौं-मैकोट में उन्होंने 37 स्कूली बच्चों को स्कूल बैग, कॉपियां, पेंसिल व अन्य स्कूल सामग्री भी बांटी।
साथ ही डुंगरी गांव में एक गरीब विधवा महिला को सात हजार रुपये की आर्थिक मदद दी। छह दिनों तक क्षेत्र में घूमने के बाद सैलानियों का दल रविवार को लौट गया। जर्मनी की मलीना ने ग्रामीणों से अगले वर्ष ग्रुप के साथ दोबारा आने का वायदा किया।