सामान्य PF प्रणाली में हुए बड़े बदलाव, सरकारी कर्मचारियों को मिलेंगे कईं फायदे
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प्रदेश मंत्रिमंडल ने बृहस्पतिवार को सामान्य भविष्य निधि नियमावली 2006 में संशोधन को मंजूरी दे दी है। इन संशोधनों के लागू होने पर प्रदेश सरकार की सेवा से जुड़े करीब दो लाख कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा।
कैबिनेट के फैसले के मुताबिक, नियमावली में आश्रित की परिभाषा में माता-पिता को भी शामिल कर दिया गया है। यानी जिन लोकसेवकों (अभिदाताओं) पर माता-पिता भी पूर्ण रूप से निर्भर हैं, उन्हें भी आश्रित श्रेणी में रखा गया है।
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अभी तक इसमें पूर्णरूप से आश्रित भाई और बहन ही शामिल थे। मानकों में दूसरा बड़ा बदलाव जीपीएफ के आहरण के संबंध में है। अभी तक जीपीएफ निकालने के लिए 12 साल की सेवा की शर्त थी, जिसे घटाकर 10 साल कर दिया गया है।
आश्रित परिवार के सदस्य की हाईस्कूल से ऊपर शैक्षिक, प्राविधिक, व्यावसायिक शिक्षा के लिए निर्धारित सीमा के हिसाब से जीपीएफ राशि आहरित की जा सकेगी।
ये संशोधन भी हुआ
अभी तक तीन महीने का वेतन या खाते में जमा धनराशि का पचास फीसदी राशि में से जो भी कम हो, का आहरण होता था। अब अभिदाता छह महीने के वेतन के बराबर राशि आहरित कर सकेगा।
बड़े कार्यों मसलन, भूमि, आवास, फ्लैट खरीदने या उनका निर्माण करने अथवा पुराने मकान का जीर्णोद्धार करने के लिए भी जीपीएफ आहरण की सेवा अवधि को तीन साल कम किया गया है। अब इस उद्देश्य से 15 वर्ष के स्थान पर 12 वर्ष की सेवा में जीपीएफ राशि आहरित हो सकेगी।
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अभी सेवानिवृत्ति से पहले जीपीएफ की 90 फीसदी की राशि का भुगतान हो जाने की प्रक्रिया है। अवशेष 10 फीसदी राशि का भुगतान एजी की संस्तुति के बाद जारी होता है। इस प्रक्रिया में समय लग रहा था। अब एजी को यह प्रस्ताव सेवानिवृत्ति से छह महीने पहले भेज दिया जाएगा। अभी तक तीन महीने पहले प्रस्ताव भेजने का प्रावधान था।