गौरीकुंड हादसा: फोन पर बजती रही घंटी, पर जवाब नहीं मिला, मलबे के ढेर में नजर गड़ाए रहे लापता लोगों के परिजन
गौरीकुंड में हुए हादसे में अपनों की तलाश में परिजन दिनभर यहीं खड़े हैं। यहां रेस्क्यू टीम के पास आकर बार-बार अपनों के बारे में पूछ रहे हैं। हादसे में अभी तक 20 लोग लापता हैं।
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डाटपुल के पास हुए भूस्खलन हादसे में आगरा निवासी बबलू का बड़ा भाई और साला भी लापता हो गया। बताया कि घटना के बाद काफी देर तक मोबाइल पर घंटी बजती रही। लेकिन किसी ने नहीं उठाया। दो दिन से बबलू, मबले के ढेर पर नजर गड़ाए हुए है।
आगरा निवासी बबलू गौरीकुंड में दुकान का संचालन कर रहा था। दुकान में उसका भाई व साला भी था। वह घटना के दौरान खाना खाने गया हुआ था। लगभग साढ़े 11.30 बजे टिन के बजने जैसी तेज आवाज के साथ पहाड़ी गिरी और सबकुछ खत्म हो गया। दुकान का नामोनिशान नहीं था।
भाई और साला नहीं मिले
सिर्फ सीमेंट का टूटा पिलर लटका हुआ था। लेकिन भाई और साला नहीं मिले। भाई के मोबाइल पर संपर्क किया तो घंटी बजती रही। कॉल रिसीव नहीं हुई। यहां तक कि घटना के लगभग एक घंटे बाद भी मोबाइल पर घंटी जाती रही।
एक बार ऐसा लगा, जैसे किसी ने फोन उठाया पर भी कोई जवाब नहीं मिला। इस बारे में एसडीआरएफ के जवानों से पूछा तो उन्होंने बताया कि बारिश के दौरान कई बार कॉल करने पर रिसीव होती है, लेकिन सही मायने में कोई संपर्क होता नहीं है। बबलू शनिवार को दिनभर अपने भाई और साले की खोज के लिए मलबे को निहारता रहा।
परिजनों की नम आखें और उदास चेहरे बयां कर रहे दर्द
रुद्रप्रयाग जनपद के जलई, बष्टी, उत्यासू और तिलवाड़ा के लापता हुए आशु, रणवीर, रोहित और प्रियांशु की खोजबीन के लिए उनके परिजन मौके पर पहुंचे हुए हैं। नम आंखों और उदास चेहरों के साथ परिजन मलबे के ढेर में रेस्क्यू के दौरान होती एक-एक हलचल को देख रहे हैं। दुख में उनके मुंह से शब्द नहीं निकल रहे हैं। दूसरी तरफ लापता युवकों के घरों में सन्नाटा पसरा हुआ है।
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उस तरफ जाने में भी लग रहा डर
हादसे के बाद से गौरीकुंड के लोग दशहत में हैं। स्थानीय निवासी महेशानंद गोस्वामी बताते हैं जो मंजर उन्होंने देखा, वह बार-बार आंखों में घूम रहा है। यकीन नहीं हो रहा है कि सड़क से 50 मीटर ऊपरी से टूटी पहाड़ी के हिस्से से इतना बड़ा नुकसान हो सकता है। अब, उस तरफ जाने में भी डर लग रहा है। वहीं, गौरीशंकर गोस्वामी बताते हैं, केदारनाथ आपदा के बाद से गौरीकुंड की सुरक्षा, संरक्षण को लेकर कोई योजना बन ही नहीं पाई।