पर्यटकों के लिए बंद हुआ गंगोत्री नेशनल पार्क, लेकिन वहां जो हुआ उसने देशभर में मचा दी थी हलचल
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देश-दुनिया में सर्वाधिक चढ़ी वाली चोटियों, सर्वाधिक ऊंचाई वाले कालिंदी ट्रेक और हिम तेंदुआ, भूरा भालू आदि दुर्लभ वन्य जीवों की मौजूदगी वाले गंगोत्री नेशनल पार्क के द्वार बुधवार को पर्यटकों की आवाजाही के लिए बंद कर दिए गए हैं।
बीते वर्षों के मुकाबले इस साल ज्यादा संख्या में पर्वतारोही, ट्रेकर्स और पर्यटकों के पहुंचने से पार्क गुलजार रहा। इससे जहां ट्रैकिंग एवं माउंटेनियरिंग से जुड़े कारोबारियों को फायदा मिला, वहीं पार्क प्रशासन को भी अच्छी आमदनी हुई।
सतोपंथ, भागीरथी एवं गंगोत्री श्रृंखला समेत तीन दर्जन से ज्यादा हिमशिखरों तथा सर्वाधिक 5,950 मीटर ऊंचाई से गुजरने वाले गंगोत्री-कालिंदी-बद्रीनाथ ट्रेक की मौजूदगी के चलते गंगोत्री हिमालय क्षेत्र दशकों से देशी-विदेशी पर्वतारोहियों के आकर्षण का केंद्र रहा है।
इसके अलावा यहां हिम तेंदुआ, भूला भालू, भरल मृग, लाल लोमड़ी, अर्गली भेड़, लिंग्स(जंगली बिल्ली), स्नो कॉक आदि दुर्लभ वन्य जीवों की मौजूदगी के चलते बीते कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में वन्य जीव प्रेमी भी इस ओर रुख करने लगे हैं।
उम्मीद से ज्यादा आए पर्यटक
गंगा के उद्गम गोमुख तथा बर्फ से ढके हिमशिखरों का नजारा करने भी बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं। इस साल 15 अप्रैल को गंगोत्री नेशनल पार्क पर्यटकों की आवाजाही के लिए खोला गया था और आज पार्क के द्वार शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए।
इस साल गंगोत्री नेशनल पार्क क्षेत्र में पड़ने वाले गोमुख, तपोवन, केदारताल एवं नेलांग घाटी की सैर के लिए कुल 16,028 पर्यटक पहुंचे, जिनमें 1250 विदेशी पर्यटक शामिल रहे। इसके अलावा सर्वाधिक 31 पर्वतारोही दल गंगोत्री हिमालय की विभिन्न चोटियों पर आरोहण के लिए पहुंचे, जिसमें 10 पर्वतारोही दल विदेशी थे।
गंगोत्री-कालिंदी-बद्रीनाथ ट्रेक पर चार विदेशियों समेत कुल दस ट्रेकिंग दलों ने कदम बढ़ाए, जबकि बीते साल पार्क क्षेत्र में कुल 14,853 पर्यटक, बीस पर्वतारोही दल तथा कालिंदी ट्रेक पर छह ट्रेकिंग दल पहुंचे थे।
गंगोत्री नेशनल पार्क में पर्यटकों, पर्वतारोहियों एवं ट्रेकर्स की आवाजाही बढ़ने से ट्रेकिंग एवं माउंटेनियरिंग से जुड़े कारोबारियों को काफी फायदा मिला। पार्क प्रशासन ने भी विभिन्न कैंपिंग आदि शुल्कों से करीब 38 लाख रुपये राजस्व कमाया।
इस बार चर्चाओं में रहा गंगोत्री नेशनल पार्क
गंगोत्री नेशनल पार्क इस साल भरल मृगों में अज्ञात बीमारी के लिए भी चर्चाओं में रहा। केदारताल क्षेत्र में एक भरल मृग की संक्रामक रोग से मौत को भारतीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने भी गंभीरता से लिया और सरकार तथा पार्क प्रशासन को इसकी रोकथाम के लिए निर्देशित किया। क्षेत्र में बीमार भरल मृगों की खोजबीन के लिए कई बार अभियान चलाया गया, लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली।
पार्क प्रशासन ने पार्क क्षेत्र में संक्रमण रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए। इसके साथ ही इस सीजन में निम और उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद के अभियान दल ने लगातार चार अनाम चोटियों पर सफल आरोहण कर कीर्तिमान बनाया। गंगा के उद्गम गोमुख के स्वरूप में आए बदलाव भी चर्चाओं में रहे। नीला ताल टूटने से आया मलबा गंगोत्री ग्लेशियर के मुहाने पर पसरने से यहां रीवर बैड काफी ऊंचा हो गया। गोमुख में अब एक की जगह तीन स्थानों से गंगा की धारा निकल रही है।
इसके साथ ही गोमुख के दाहिने छोर से तपोवन की ओर जाने वाला रास्ता क्षतिग्रस्त हो गया। अब पार्क प्रशासन ने भोजवासा में ही गंगा नदी पर ट्राली लगाकर तपोवन की ओर जाने का रास्ता तैयार किया है। बीते माह एक विदेशी पर्यटक द्वारा पार्क क्षेत्र में भारत-चीन सीमा के निकट प्रतिबंधित सेटेलाइट फोन का उपयोग भी चर्चाओं में रहा। हालांकि खुफिया एजेंसियां सेटेलाइट फोन बरामद करने में नाकाम रहीं।
इस बार मौसम अनुकूल रहने के कारण गंगोत्री नेशनल पार्क क्षेत्र में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ी है, जिससे पार्क प्रशासन को विभिन्न शुल्कों से करीब 38 लाख रुपये की आमदनी हुई है। बीते तीन नवंबर को क्षेत्र में भारी बर्फबारी होने के बाद से पार्क में पर्यटकों की आवाजाही बंद है। आज गंगोत्री नेशनल पार्क के द्वार सर्दियों के लिए बंद कर दिए गए हैं।
-प्रताप पंवार, वन क्षेत्राधिकारी, गंगोत्री नेशनल पार्क उत्तरकाशी