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वैज्ञानिकों को गंगा किनारे मिलीं हिमयुग की चौंकाने वाली निशानियां

Tue, 05 Jan 2016 04:10 PM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 05 Jan 2016 04:10 PM IST
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Ganga has little signs of Ice Age.

गंगा बेसिन में जलवायु परिवर्तन की स्थिति देखने निकले विज्ञानियों को मिले नमूनों ने चौंका दिया है। नमूनों की रासायनिक जांच में तीन सौ साल पहले आए हिमयुग की तस्वीर उभरी है। यही नहीं गंगा बेसिन में आईं बड़ी बाढ़ आपदाओं के सबूत भी मिले हैं।

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गंगा बेसिन के सर्वेक्षण के लिए निकली वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान की टीम ने बेसिन केकई स्थानों से नमूने जुटाए थे। नमूनों की रासायनिक जांच से पता चला है कि तीन सौ वर्ष पहले गंगा बेसिन छोटे हिमयुग केदौर से गुजरा था। यह वही दौर था जिसे कुछ वैज्ञानिक हिमालय में सूखे का दौर मानते रहे हैं। नमूनों की जांच में पाया गया है कि इस दौरान कुछ अलग तरह की बरसात हुई थी।
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निचले हिमालय में पानी टूट कर बरसा था जबकि हिमालय का ऊपरी क्षेत्र सूखा रहा। वैज्ञानिक इसे जलवायु परिवर्तन का नतीजा मान रहे हैं। इस दौरान मानसून निचले हिमालय में आकर रुक गया था। वैज्ञानिकों ने जांच के बाद यहां के जलवायु आंकड़ों को सुरक्षित कर लिया है।

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मानसून के स्थापित होने से बाढ़ आपदाएं आईं

Ganga has little signs of Ice Age.

इससे मौजूदा वक्त में जलवायु परिवर्तन की स्थिति को और बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा। वैज्ञानिकों ने चमोली जिले केश्रीनगर क्षेत्र से गंगा की सहयोगी नदी अलकनंदा के किनारे से भी साक्ष्य जुटाए हैं।

वैज्ञानिकों के मुताबिक छोटे हिमयुग केदौरान ही गंगा बेसिन में कई फ्लड्स प्लेन्स की रचना हुई थी। उल्लेखनीय है कि गंगा बेसिन आज भी एक हजार वर्षों में आईं 22 बड़ी बाढ़ आपदाओं की निशानियां खुद में संरक्षित किए हुए है।

‘गंगा बेसिन के नमूनों की जांच की गई जिससे तीन सौ साल पहले की स्थिति का पता चला है। यह भी ज्ञात हुआ है कि लोअर हिमालय में मानसून के स्थापित होने से बाढ़ आपदाएं आईं। यह छोटे हिमयुग का दौर था।’
- डॉ. प्रदीप श्रीवास्तव (वरिष्ठ वैज्ञानिक, वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान)

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