गांधी जयंती 2018: इस घटना के बाद बापू ने हाथ में झाड़ू उठाकर देश को स्वच्छ बनाने का लिया था संकल्प
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बापू के जिस स्वच्छता अभियान को भारत सरकार आज चला रही है, उसकी प्ररेणा बापू को 1915 के हरिद्वार कुंभ में मिली थी। गोपाल कृष्ण गोखले की सलाह पर अफ्रीका से आने के बाद बापू देशाटन करते हुए पहली बार हरिद्वार पहुंचे थे।
उस समय चल रहे कुंभ मेले में देश की भीषण गरीबी और हरिद्वार की गंदगी देखकर बापू दंग रह गए। यहां से लौटते ही बापू ने स्वयं झाड़ू उठाकर देश को स्वच्छ बनाने का संकल्प लिया था।
ब्रिटिश सत्ता के जुल्मों से जूझती गरीब जनता की बेबसी और धर्म की ताकत को बापू ने पहली बार हरिद्वार में ही जाना था। देश दर्शन करते हुए उत्तर भारत की ओर निकले बापू का आकर्षण हरिद्वार कुंभ था और गंगा पार गुरुकुल चलाकर शिक्षा की क्रांति फैला रहे स्वामी श्रद्धानंद भी थे।
गंगा रक्षा तथा बांध विरोधी आंदोलन को भी देखना चाहते थे
वे महामना मालवीय द्वारा उन दिनों हरिद्वार में चलाए जा रहे गंगा रक्षा तथा बांध विरोधी आंदोलन को भी देखना चाहते थे। बापू हरिद्वार के बाजारों की गंदगी देखकर व्यथित हो उठे। बाद में उन्होंने अपने पत्र हरिजन में लिखा कि हरिद्वार की गलियां जूठी पतलों और जूठे दौनों के भरी पड़ी है।
उन्होंने लिखा की संकरी गलियां होने के कारण स्वच्छता को कोई भी प्रबंध नहीं है। बापू ने हरिद्वार और कनखल के धनाढ्य महंतों से मिलकर हरिद्वार को स्वच्छ रखने का आग्रह किया। उन्होंने स्वामी श्रद्धानंद से निवेदन किया कि वे हरिद्वार में मांस और शराब कभी न बिकने दें।
बापू फिर 1916 और 1929 में भी हरिद्वार आए। उन्होंने गंगा पर गुुरुकुल में ब्रह्मचारियों के समक्ष व्याख्यान भी दिया। बापू ने स्वामी श्रद्धानंद से देश की आजादी के बार में गहन मंत्रणा की।
श्रद्धानंद ने उन्हें महात्मा की उपाधि से अलंकृत किया
उन्हीं से बापू ने उत्तराखंड के धामों में स्वच्छता बनाने का आग्रह किया। इस धर्मनगरी में बापू ने तीनों बार अपना सफर घोड़े-तांगे में किया। इस नगरी में बापू की पहली प्रतिमा दो वर्ष पूर्व लगाई गई। यद्यपि गांधी मार्ग बहुत पहले से बना हुआ है।