{"_id":"71fb4927b367b0c43c9371bd00031452","slug":"frontline-double-whammy-for-rural-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दोहरी मार झेल रहे सीमावर्ती ग्रामीण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दोहरी मार झेल रहे सीमावर्ती ग्रामीण
ब्यूरो/अमर उजाला, कठुआ
Updated Fri, 19 Sep 2014 01:51 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सीमावर्ती इलाकों के लोगों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। एक तरफ पाकिस्तान की ओर से होने वाली फायरिंग से लोग बेहाल हैं तो दूसरी तरफ बरसात के सीजन में आने वाली बाढ़ हर साल बड़े पैमाने पर नुकसान करती है। सीमा जन कल्याण समिति ने इन समस्याओं को जिला प्रशासन के माध्यम से रियासत के मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन के माध्यम से भेजा है।
विज्ञापन
साथ ही मांग की है कि बाढ़ प्रभावितों को मुआवजा वर्तमान महंगाई की दर के हिसाब से दिया जाए। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावितों को दिया जाने वाला मुआवजा वास्तविक नुकसान से कम होता है। ऐसे में आंकलन के दौरान महंगाई की दर को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
विज्ञापन
ज्ञापन देने जिला उपायुक्त कार्यालय पहुंचे जन कल्याण समिति के प्रचार प्रमुख देवराज और समिति के अध्यक्ष जयदेव सिंह पठानिया ने भारत पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा के पास बसे इलाकों पर दोहरी मार पड़ रही है। हजारों एकड़ भूमि सीमा पर तनाव के हालात की वजह से प्रभावित होती आ रही है।
विज्ञापन
बड़े पैमाने पर लोगों का नुकसान हुआ है जिसका मुआवजा आज तक नहीं दिया गया। वहीं बाढ़ की वजह से भी खासा नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती इलाकों को न सिर्फ फौरी तौर पर बाढ़ से हुए नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए बल्कि सीमा से सटे लोगों को जम्मू पठानकोट नेशनल हाईवे के निकट आवास बनाने के लिए भूमि आवंटित की जानी चाहिए ताकि सीमा पर अशांति के दौरान भी लोगों के जान माल पर कोई खतरा न हो।