नहीं रही स्वतंत्रता सेनानी डा. सत्यवती सिन्हा, 16 साल की उम्र में किया था पहला आंदोलन
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91 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी डा. सत्यवती सिन्हा का शुक्रवार अपराह्न निधन हो गया है। उनके पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन करने के लिए उनके बीटी गंज स्थित घर पर लोगों को तांता लगा हुआ है। आज शनिवार दोपहर राजकीय सम्मान के साथ सोत स्थित श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
करीब एक वर्ष से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी डा. सत्यवती सिन्हा अस्वस्थ चल रही थीं। वह अपनी बड़ी बेटी किरण कौशिक के साथ उनके चंद्रपुरी स्थित निवास में रहती थी। एक सप्ताह से वह राम नाम का जाप कर रही थी। डा. सत्यवती सिन्हा का जन्म 23 जून 1926 को पथरा, जिला बरेली (उत्तर प्रदेश) में हुआ था।
इनके पति स्व. डा. जगदीश नारायण सिन्हा भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। आठ मार्च 1942 में उनकी शादी हुई थी। महज 16 साल की उम्र में उन्होंने देश की आजादी के लिए अपने पति के साथ मिलकर अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन शुरू किया था। आजादी के लिए महात्मा गांधी की ओर से चलाए गए आंदोलन में उन्होंने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया।
जेल में कई यातनाएं सही थी इस वीरांगना ने
डा. सत्यवती सिन्हा को कई बार जेल जाना पड़ा और अंग्रेजों की यातनाएं सहनी पड़ी, लेकिन देश आजाद होने तक उन्होंने अपना आंदोलन जारी रखा। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी डा. सत्यवती सिन्हा अपराह्न साढ़े तीन बजे चंद्रपुरी में निधन हुआ। उसके बाद इनका पार्थिव शरीर बीटी गंज स्थित सिबलिंग स्कूल में लाया गया।
यह स्कूल इनका ही है और भवन के एक हिस्से में इनका परिवार रहता है। यह अपने पीछे भरापूरा परिवार छोड़ गई हैं। परिवार में उनका एक बेटा विभूति सिन्हा, बेटी किरण कौशिक, डा. चारु खरे, डा. सुनीता सक्सेना और उनका पूरा परिवार है।
स्वतंत्रता सेनानी डा. सत्यवती सिन्हा का अंतिम संस्कार आज शनिवार दोपहर 12 बजे राजकीय सम्मान के साथ सोत स्थित श्मशान घाट में किया जाएगा। उनके नाती अतिन ने बताया कि नानी के पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए कुछ देर सुभाष गंज में राष्ट्रीय ध्वज स्थल पर रखा जाएगा। यहां से उनके पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट ले जाया जाएगा।